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यह कैसी मानसिकता है

Fri, 11 Apr 2014 07:31 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 11 Apr 2014 07:31 PM IST
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which type of mentality is this?

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव को यह जानकार हैरानी नहीं होनी चाहिए कि जिस सूबे में उनकी पार्टी की सरकार है, वह महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में देश में तीसरे नंबर पर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2012 तक के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि उस वर्ष सूबे में महिलाओं के खिलाफ अपराध के दर्ज 23 हजार से अधिक मामलों में तकरीबन दो हजार मामले दुष्कर्म के थे!

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इसके बावजूद नेताजी ने मुंबई की शक्ति मिल में हुए दोहरे बलात्कार के मामलों के दोषियों को सुनाए गए मृत्युदंड पर न केवल ऐतराज किया है, बल्कि कुछ ऐसी बातें की हैं, जिनसे महिलाओं के प्रति उनकी संवेदनहीनता और गैरजिम्मेदाराना रवैये का ही पता चलता है।
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वर्ष 2012 में दिल्ली में एक 23 वर्षीय युवती के साथ हुई सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद सारा देश उद्वेलित हो गया था, जिसकी परिणति महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए उस नए कानून के रूप में हुई थी, जिसमें दुष्कर्मियों को मृत्युदंड देने तक का प्रावधान किया गया है।
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पिछले हफ्ते ही अदालत ने शक्ति मिल के दोहरे हत्याकांड के तीन दोषियों को इस नए कानून के रूप में सामने आई भारतीय दंड संहिता की धारा 376 ई के तहत देश में पहली बार मौत की सजा सुनाई है। इसी मामले का हवाला देते हुए मुलायम सिंह कहते हैं कि लड़के हैं, गलती हो जाती है?

बयान की तीखी आलोचना होने के बाद उन्होंने जो सफाई दी है, उसका लब्बोलुआब यह है कि वह तो मृत्युदंड को खत्म करने की बात कर रहे थे, जिस पर दुनिया भर में बहस हो रही है। मगर बात इतनी सीधी है नहीं, वह एक माहिर राजनेता हैं और उन्हें पता होता है कि वह कब क्या कह रहे हैं। बची-खुची कसर उनकी पार्टी के नेता अबु आजमी ने महिलाओं को ही कठघरे में खड़ा करके कर दी है। महिलाओं के प्रति दकियानूसी सोच रखने वाले लोगों की हमारे देश में कमी नहीं है।


कभी महिलाओं के पहनावे पर, तो कभी उनकी जीवन शैली और उनके करियर को लेकर उंगलियां उठाई जाती हैं। हैरानी की बात यह भी है कि इस चुनाव में महिलाओं को संसद में तैंतीस फीसदी आरक्षण देने का मुद्दा सिरे से गायब दिख रहा है। क्या यह उसी पुरुषवादी मानसिकता की तस्दीक नहीं करता?

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