{"_id":"41a26b1272cfd1d93e78d4ddadf56e6f","slug":"where-is-achae-din-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"अच्छे दिन की आहट","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
अच्छे दिन की आहट
नई दिल्ली
Updated Thu, 15 Jan 2015 07:33 PM IST
विज्ञापन
रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने रेपो रेट में 25 बेसिक पॉइंट की कटौती कर आर्थिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है, जिसका असर शेयर बाजार से लेकर रियल एस्टेट क्षेत्र तक में दिख रहा है। अपनी पिछली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में राजन ने यह संकेत जरूर दिए थे कि यदि महंगाई नियंत्रित रही, तो वह ब्याज दर में कटौती कर सकते हैं, लेकिन बजट पेश किए जाने से पहले इसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी।
विज्ञापन
हालांकि यह भी सही है कि मई में एनडीए सरकार के आने के बाद से यह उम्मीद की जा रही थी कि रिजर्व बैंक कोई ऐसा कदम उठा सकता है, जिससे नई सरकार के निवेश और विकास के वायदों के साथ तालमेल बिठाया जा सके। मगर जुलाई-अगस्त के दौरान खाद्य महंगाई, जिसके लिए अल नीनो को जिम्मेदार माना गया था, एक बड़ा कारण थी, जिसने रिजर्व बैंक के पैर पीछे खींच रखे थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से एक अंक पर आ गई महंगाई दर और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में लगातार गिरावट ने रेपो रेट में कटौती के लिए अनुकूल माहौल बनाया। वास्तव में मई, 2013 के बाद से रिजर्व बैंक ने ब्याज दर में किसी तरह की कटौती की ही नहीं थी, इस लिहाज से उसका यह कदम अहम है।
विज्ञापन
रिजर्व बैंक की इस घोषणा के तुरंत बाद भारतीय स्टेट बैंक सहित कई बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए हैं, जिससे मकान और वाहनों के कर्ज पर ईएमआई कम हो सकती है। आम उपभोक्ताओं के लिए इसे अच्छे दिन की आहट कहा जा सकता है, जिसे लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम में गिरावट से भी राहत मिली है। मौद्रिक नीति में आए इस बदलाव से वित्त मंत्री अरुण जेटली किस तरह तालमेल बिठाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
विज्ञापन
यूपीए सरकार के आखिरी वर्षों में नीतिगत जड़ता ने विकास दर को पांच फीसदी से नीचे ला दिया था। पिछली यूपीए सरकार महंगाई को भी नियंत्रित नहीं कर पा रही थी, जिससे रिजर्व बैंक भी कोई कदम नहीं उठा सक रहा था। यदि, जैसा कि आर्थिक पंडित अनुमान लगा रहे हैं, महंगाई पांच से छह फीसदी के बीच रहती है, तो इसका मतलब यही है कि आने वाले समय में रिजर्व बैंक ब्याज दर में और कटौती कर सकता है। मगर फिलहाल रिजर्व बैंक के गवर्नर ने गेंद मोदी सरकार के पाले में डाल दी है, जिसे अपना पहला पूर्ण बजट पेश करना है।