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मरीजों का क्या जब खुद हुआ बीमार

Thu, 24 Apr 2014 01:23 AM IST
Updated Thu, 24 Apr 2014 01:23 AM IST
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मरीजों का क्या जब खुद हुआ बीमार
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मंडी अटेली। स्थानीय सामान्य अस्पताल लोगों को सुविधा देने में विफल साबित हो रहा है। अस्पताल का आधुनिक तीन मंजिला नवनिर्मित भवन लोगों के लिए किसी काम का नहीं है। सामान्य अस्पताल का दर्जा हासिल होने के बाद भी यहां चिकित्सकों का टोटा और आधुनिक मशीनों का अभाव है।
फरवरी 2009 में तत्कालीन विधायक नरेश यादव ने अनाज मंडी में हकीकत रैली के नाम से मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की रैली करवाई थी। तब मुख्यमंत्री ने अटेली के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोे अपग्रेड करने का एलान किया था।
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 उन्होंने घोषणा की थी कि इसे अति शीघ्र 50 बिस्तरों के अस्पताल के रूप में सुचारु करके आम जनता को सौंप दिया जाएगा। अस्पताल की तीन मंजिला इमारत तैयार होने के बाद मुख्यमंत्री ने 21 जनवरी 2013 को इसका उद्घाटन भी किया था। लोगों की उम्मीद थी कि अब कस्बा अटेली में ही उपचार मिल पाएगा, लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं। यहां चिकित्सकों के 9 में से 8 पद खाली पड़े हैं।
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 गौरतलब है कि क्षेत्र के लोगों की लंबी मांग के बाद इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सामान्य अस्पताल के रूप में दर्जा देकर अपग्रेड किया गया था। फिहलाल कस्बे के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के अलावा राजस्थान के लोग भी यहां उपचार के लिए दस्तक देते हैं, लेकिन चिकित्सकों के अभाव के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।


-चिकित्सकाें के पद हैं रिक्त
50 बेड के इस सामान्य अस्पताल में एसएमओ के अलावा 8 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन यहां केवल एसएमओ ही कार्यरत है और बाकी 8 पद रिक्त हैं।

-200 से ज्यादा मरीज आते है हर रोज
उपचार देने के लिए दो चिकिस्तकों को बाछौद चिकित्सा केन्द्र से व एक को स्वास्थ्य केन्द्र से यहां काम चलाने के लिए प्रतिनियुक्ति दी गई है। आए दिन 200 से अधिक ग्रामीण क्षेत्र के लोग उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अभाव के कारण यहां उपचार न मिलकर उन्हें अन्य अस्पतालाें का मुंह देखना पड़ रहा है। विशेषकर महिला चिकित्सक की कमी कई वर्षों से यहां बनी हुई है।


आधुनिक उपकरण भी नहीं
सामान्य अस्पताल को बनाने में लगभग 760.82 करोड़ रुपये की राशि पानी की तरह खर्च की गई। इतनी राशि से केवल भवन निर्माण ही हो पाया। ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, एक्स रे मशीन व लेबर रूम की सुविधा आज तक सामान्य अस्पताल में नहीं है। जनता को उम्मीद थी कि 50 बेड के सामान्य अस्पताल में जरनल सर्जन, सर्जन, महिला चिकित्सा, हड्डी विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ के आने पर उन्हें अच्छी सुविधा प्राप्त होगी। पर क्षेत्र की जनता को आज तक निराशा ही हाथ लगी।

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