फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Weak monsoon

कमजोर मानसून

Tue, 02 Jun 2015 07:52 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 02 Jun 2015 07:52 PM IST
विज्ञापन
Weak monsoon

बेमौसम बारिश की मार झेल चुके कृषि क्षेत्र का संकट इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने के अनुमान ने और बढ़ा दिया है। अमूमन पहली जून को मानसून केरल के तट से टकराता है और जून के मध्य तक देश के बड़े हिस्से में इसकी आमद हो जाती है। इस बार इसके आने में विलंब तो हो ही चुका है, मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून के अपने पहले के 93 फीसदी बारिश के अनुमान को बदलते हुए अब सिर्फ 88 फीसदी बारिश का संशोधित अनुमान जारी किया है, जिससे समझा जा सकता है कि आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र के समक्ष किस तरह की मुश्किलें पेश आने वाली हैं।

विज्ञापन


जानकार बताते हैं कि यदि यह अनुमान सही साबित हुए, तो देश की तकरीबन आधी खेतिहर जमीन सूखी रह जाएगी! चिंता की बात यह है कि देश के उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र में तो 85 फीसदी तक बारिश होने का अनुमान लगाया गया है, जिसका असर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों के पैदावार पर हो सकता है। इन क्षेत्रों के किसानों पर यह दोहरी मार होगी, क्योंकि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण उनकी रबी की फसल को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है, और अब यदि बारिश कम हुई, तो इसका असर धान, कपास, गन्ना और सोयाबीन जैसी फसलों के उत्पादन पर पड़ सकता है।
विज्ञापन


बेशक, औद्योगिक उत्पादन, सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों का देश की अर्थव्यवस्था में खासा योगदान है, लेकिन इसमें 15 फीसदी का योगदान करने वाले कृषि क्षेत्र का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि इस पर देश की दो-तिहाई आबादी निर्भर है। लिहाजा कृषि पर किसी भी तरह के संकट का असर चौतरफा होता है। यह अकारण नहीं है कि मानसून का ताजा संशोधित अनुमान जारी होने के थोड़ी देर बाद ही मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक 600 अंक तक गिर गया!
विज्ञापन
विज्ञापन


2013 को छोड़ दिया जाए, तो पिछले चार वर्षों से मानसून रूठा ही हुआ है। पिछले वर्ष भी कमजोर बारिश का असर खाद्यान्न उत्पादन पर देखा गया था। यदि मानसून ने अपना यही रंग दिखाया, तो रिजर्व बैंक की उदारता के बावजूद सब पर महंगाई की मार भी पड़ सकती है। इसके साथ ही उन योजनाओं पर भी पानी फिर सकता है, जिनके जरिये केंद्र सरकार निवेश जुटाना चाहती है। अच्छी बात यह है कि मोदी सरकार ने पहले ही आपात योजना पर तैयारी शुरू कर दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed