{"_id":"410d3703501f46139a4de04608cc3b6a","slug":"wake-up-politics","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजनीति से ऊपर उठें","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
राजनीति से ऊपर उठें
नई दिल्ली
Updated Thu, 05 Jun 2014 07:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिलेश यादव ने जब उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी, तो उनसे यही अपेक्षा की गई थी कि पारंपरिक राजनीति में उलझने के बजाय वह सूबे को विकास के रास्ते पर ले जाएंगे और लोगों को बुनियादी चीजों के साथ ही सुरक्षा भी मुहैया कराएंगे। मगर बदायूं में दो चचेरी बहनों के साथ सामूहिक बलात्कार और उन्हें पेड़ पर लटका दिए जाने की घटना उनकी सरकार की चौतरफा नाकामी को ही रेखांकित करती है।
विज्ञापन
मसलन, बदायूं के जिस कटरा सआदतगंज की यह घटना है, उस गांव के अधिकांश घरों में शौचालय तक नहीं है। चौदह-पंद्रह बरस की ये दोनों लड़कियां घटना वाली रात शौच के लिए बाहर गई थीं और यदि उनके घरों पर शौचालय होता, तो उन्हें बचाया जा सकता था। यही नहीं, उत्तर प्रदेश बिजली की भीषण समस्या से भी जूझ रहा है, नतीजतन ग्रामीण इलाकों में दस से लेकर पंद्रह घंटे तक बिजली नहीं होती।
विज्ञापन
इन दोनों लड़कियों को भी अंधेरे में ही घर से बाहर निकलना पड़ा था। हद तो तब हो गई, जब उनके लापता होने के अंदेशे में जब उनके परिजनों ने पुलिस से फरियाद की, तो उन्हें अपमानित होना पड़ा और उनके बारे में उन्हें तभी पता चल सका, जब अगले दिन उन्हें पेड़ पर लटका पाया गया! इस बर्बर घटना में पुलिस की संलिप्तता सूबे की कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति बताने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा यदि यह सच है कि इस घटना के पीछे जातिगत साजिश थी, जैसा कि निचले तबके से ताल्लुक रखने वाले परिवार की इन लड़कियों के परिजनों ने आरोप लगाया है, तो यह एक बड़ी चुनौती की ओर भी इशारा है।
विज्ञापन
बेशक, प्रदेश सरकार ने कुछ शीर्ष अधिकारियों के तबादले किए हैं, कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं, लेकिन लोगों के मन में जो अविश्वास पैदा हो गया है, उसे दूर करने के लिए अत्यधिक संवेदनशील होने की जरूरत है। इसके उलट निर्भया कांड के बाद हमारी सामूहिक चेतना को झकझोर कर रख देने वाली इस घटना पर सूबे में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं के जिस तरह से बयान आए हैं, वे हैरान करने वाले हैं।
यदि संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका तक इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश की सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है, तो सूबे के युवा मुख्यमंत्री को यह एहसास होना चाहिए कि कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है।