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चौकसी जरूरी है

Fri, 17 Oct 2014 11:43 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 17 Oct 2014 11:43 PM IST
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Vigilance is required

सेनाध्यक्षों के संयुक्त सम्मेलन में साइबर स्पेस पर वर्चस्व बनाए रखने की जरूरत बताकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे सैन्य बल को समयोचित सलाह दी है। जब आमने-सामने के युद्ध बीते दौर की बात हो चुके हैं, तब रक्षा मोर्चे पर अदृश्य शत्रुओं की रणनीतियों को बेअसर करना ही आज की चुनौती है।

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सेनाध्यक्षों का संयुक्त सम्मेलन वैसे तो एक सालाना आयोजन है, जिसमें सुरक्षा के मोर्चे पर चुनौतियों और उपलब्धियों पर चर्चा की जाती है, पर आंतरिक और बाहरी खतरों की आशंका को देखते हुए इस बार के सम्मेलन का अपना महत्व था। जम्मू-कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवाद की विफलता ने इस्लामाबाद को इतना हताश कर दिया है कि सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर ही वह चुप नहीं है, अब परवेज मुशर्रफ और सरताज अजीज तक भड़काऊ टिप्पणी कर विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने का मंसूबा पाले हुए हैं।
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घाटी में आईएस के झंडे फहराए जाने पर सेना ने पहले चिंता जताई ही थी, अब एनएसजी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड ने शहरों में आतंकी संगठनों द्वारा मिल-जुलकर हमले करने की आशंका जताई है। अल कायदा और आईएस के पैर पसारने की आशंका तो है ही। ऐसे ही अरुणाचल में शुरू होने वाले हमारे सड़क निर्माण पर चीन का आपत्ति जताना भी दबाव बनाने की रणनीति है, जिस पर गृह मंत्री को कहना पड़ा है कि भारत जैसे बड़े देश को कोई धमका नहीं सकता। हालांकि इसी दौरान चीन के साथ सीमा विवाद पर बातचीत भी हुई है, पर बीजिंग के इरादों से हमें सावधान रहने की जरूरत है।
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जहां तक आंतरिक सुरक्षा की बात है, तो पश्चिम बंगाल के बर्दवान में विस्फोट के बाद अब मालदह में बम बरामद हुए हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं। क्रूज मिसाइल निर्भय का सफल परीक्षण सरहद पर आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए तो ठीक है, पर भीतरी सुरक्षा पर भी हमें समुचित ध्यान देना होगा। ऐसे ही एनएसजी के पास संभावित खतरों से निपटने के लिए स्वतंत्र गुप्तचर ढांचे और विशेष उपकरणों का न होना भी बड़ी कमी है, जिसे दूर करने की जरूरत है। जाहिर है, बाहरी और भीतरी खतरों को पूरी तरह बेअसर करके ही देश का विकास संभव है।

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