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सवालों के घेरे में

Tue, 07 Jul 2015 08:31 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Jul 2015 08:31 PM IST
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Under the Question mark

महज डेढ़ वर्ष पहले तक जिन शिवराज सिंह चौहान की गिनती सुशासन देने वाले मुख्यमंत्रियों में होती थी, व्यापम घोटाले और उससे जुड़ी मौतों के सिलसिले ने उनकी छवि को धूमिल कर दिया है। चौतरफा दबाव के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय से इस घोटाले की सीबीआई जांच कराने का आग्रह करने की घोषणा जरूर की है, लेकिन यह फैसला करने में उन्होंने काफी देर कर दी है।

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दरअसल नौ जुलाई को ही सर्वोच्च न्यायालय में व्यापम घोटाले को लेकर कुछ याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, जिनमें इसकी सीबीआई जांच भी एक अहम पहलू है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तो सीबीआई जांच के लिए दबाव बना ही रहे थे, लेकिन केंद्रीय मंत्री और चौहान की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उमा भारती के किसी सक्षम एजेंसी से जांच कराने की मांग ने मानो बची-खुची कसर पूरी कर दी। तो क्या चौहान ने यह फैसला राजनीतिक दबाव में लिया है? यह वाकई हैरान करने वाली बात है कि लंबे समय से इस घोटाले की सुगबुगाहट के बावजूद प्रदेश सरकार इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए थी!
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इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता कि व्यापम घोटाले के आरोपियों, गवाहों और अन्य लोगों की मौतों में से कुछ स्वाभाविक भी हो सकती हैं, लेकिन पूरे घोटाले के बचाव के लिए यह एक कमजोर तर्क है, क्योंकि भर्तियों और नियुक्तियों में हुए धन के लेन-देन पर तो अभी कोई बात ही नहीं कर रहा है। मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल का गठन 1982 में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए किया गया था, बाद में उसके जिम्मे पुलिस से लेकर शिक्षकों, वन रक्षकों और लेखापालों जैसी नौकरियों की भर्तियों की परीक्षाएं भी आ गईं। यह कितना बड़ा घोटाला है, जिसका अंदाजा इससे लग सकता है कि 2008 से 2013 के दौरान की 2,200 मेडिकल छात्रों की भर्तियां और एक हजार से अधिक नौकरियां पाने वाले संदेह के दायरे में हैं।
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इस मामले की जांच के लिए विशेष कार्य बल यानी एसटीएफ का गठन जरूर किया गया, मगर इसकी निष्पक्षता इसलिए संदेह के घेरे में रही, क्योंकि यह सीधे मुख्यमंत्री के प्रति जवाबदेह है। अच्छा तो यह होता कि केंद्र पहले ही दखल देकर खुद ही निष्पक्ष जांच की सिफारिश करता; उसे घोटाले की आंच से झुलसे राज्यपाल के बारे में फैसला करने में अब देर नहीं करनी चाहिए।

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