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दो नदियों का मिलन

Thu, 17 Sep 2015 08:04 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 17 Sep 2015 08:04 PM IST
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Two rivers interlinking

आंध्र प्रदेश में गोदावरी और कृष्णा नदियों को रिकॉर्ड समय में जोड़कर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिसका सपना कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था। यही नहीं, यह कदम उठाकर चंद्रबाबू नायडू खुद को किसानों और आम आदमी का हितैषी बताने में सफल हुए हैं, जो उनके पूर्व मुख्यमंत्री काल की छवि से मेल नहीं खाता। हालांकि अगले कुछ महीनों में केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना भी पूरी हो जाएगी। लेकिन नदी जोड़ परियोजना के विरोधी कम नहीं हैं, और जिस पोलावरम नहर के जरिये गोदावरी का पानी कृष्णा नदी में पहुंच रहा है, वह बहुद्देश्यीय परियोजना भी बहुत विवादास्पद है।

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पर्यावरणविदों के मुताबिक, पोलावरम बांध से आंध्र के एक हिस्से के अलावा पड़ोसी ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों के डूब जाने की आशंका है। अलबत्ता पट्टीसीमा सिंचाई योजना के तहत गोदावरी का पानी पोलावरम नहर के जरिये कृष्णा नदी में पहुंचाकर आंध्र प्रदेश सरकार ने वह कदम उठाया है, जो बहुत जरूरी है, और जिसकी रूपरेखा दशकों पहले बनी थी। अमूमन हर साल गोदावरी का अतिरिक्त पानी समुद्र में बह जाता था,दूसरी तरफ कृष्णा नदी में पानी का अभाव होने से बड़े इलाके में सिंचाई न होने के साथ पेयजल का भी संकट बना रहता था। लेकिन अब गोदावरी के अतिरिक्त जल को पोलावरम नहर में पंप किया जा रहा है, जहां से यह पानी कृष्णा नदी में पहुंच रहा है। इससे कृष्णा नदी के डेल्टा क्षेत्र की करीब तेरह लाख हेक्टेयर जमीन में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी तथा हजारों गांवों में पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा।
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इतना ही नहीं, कृष्णा नदी में पानी के इस अतिरिक्त प्रवाह से लगभग सूखाग्रस्त रायलसीमा को भारी राहत पहुंचेगी। उत्तर की तरह दक्षिण भारत में भी नदियों के पानी पर अधिकार की लड़ाई लंबे समय से देखी गई है। अब आंध्र में दो नदियों को जोड़ने से पानी की समस्या सुलझने की उम्मीद तो है ही, खुद राज्य सरकार ने वर्षा जल की हर बूंद का इस्तेमाल करने की प्रतिबद्धता भी जताई है। चंद्रबाबू नायडू का यह कदम अपनी जनता की बेहतरी के लिहाज से दूरगामी महत्व का फैसला तो है ही, उम्मीद करनी चाहिए कि इससे देर-सबेर दूसरी जगह भी नदियों को जोड़ने की शुरुआत होगी।

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