फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   two bupenda hudda

किलोई से इस बार दो भूपेंद्र हुड्डा मैदान में

Sat, 27 Sep 2014 02:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक Updated Sat, 27 Sep 2014 02:45 AM IST
विज्ञापन
भुप्पी के नाम से प्रसिद्ध सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को उनके ही नाम राशि ने उनके ही हलके में टक्कर दी है।
विज्ञापन


भूपेंद्र सिंह हुड्डा नाम के प्रत्याशी ने गढ़ी-सांपला-किलोई हलके से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन दाखिल कराया है। सीएम ने अपने नामांकन में भूपेंद्र सिंह नाम लिखा है। लेकिन उक्त निर्दलीय प्रत्याशी ने अपना नाम भूपेंद्र सिंह हुड्डा लिखा है।

10 साल तै कती शांत ए बैठे सां
रिटर्निंग आफिसर एवं एडीसी आरसी बिधान के पास सबसे पहले नामांकन करने इनेलो प्रत्याशी सतीश नांदल पहुंचे। उनके साथ सात आठ नेता भी अंदर चले गए। हालांकि इस पर रिटर्निंग अधिकारी ने एतराज जताया।
विज्ञापन


नेताओं ने कहा कि साब, जब कंडीडेट परचा देगा, तै हम बाहर चले जांगे। इस पर एडीसी ने कहा कि थोड़ी शांति रखो, नामांकन प्रक्रि या में समय लगेगा। इस पर गांव भालौठ के सरपंच सतीश ने कहा कि साब 10 साल हो लिए कती शांत बैठे सां। पार्टी प्रत्याशी ने एडीसी को अपना नामांकन सौंपा तो दूसरे नेता बाहर चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

समय के अभाव में आशा ने कराया खटक का नामांकन
महम प्रत्याशी के नामांकन में सीएम को काफी वक्त लग गया। वे अपना नामांकन करके करीब ढाई बजे रिटर्निंग आफिसर के कार्यालय से बाहर निकले। इसके बाद उन्हें बी. बी. बतरा का भी नामांकन कराना था और समर्थकों को भी संबोधित करना था। ऐसे में कलानौर से पार्टी प्रत्याशी शकुंतला खटक का नामांकन सीएम की पत्नी आशा हुड्डा को कराना पड़ा। नामांकन केवल शाम तीन बजे तक होना था।

सीएम पर लगाया आचार संहिता तोड़ने का आरोप
सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेसी आचार संहिता का खुलेआम उल्लघंन कर रहे हैं। लेकिन अधिकारियों को कुछ नहीं दिखाई देता। यह आरोप गढ़ी-सांपला-किलोई के इनेलो प्रत्याशी संतीश नांदल ने लगाए। नामांकन करने के बाद मीडिया के साथ बातचीत के दौरान नांदल ने कहा कि सीएम आवास के बाहर और शहर में कई जगह कांग्रेस के होर्डिंग बैनर लगे हुए हैं। कांग्रेसियों के वाहनों के काफिले ने सड़के जाम कर दी हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। पूरी सरकारी मशीनरी सीएम और अन्य कांग्रेसी प्रत्याशियों को जीताने में लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed