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खतरनाक मोड़ पर पाकिस्तान

Tue, 15 Jan 2013 10:41 PM IST
Updated Tue, 15 Jan 2013 10:41 PM IST
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turn deadly pakistan

कहां तो सीमा पर पाकिस्तान की आक्रामकता से आशंकाएं पैदा होने लगी थीं, कहां अब वह भीतरी चुनौतियों से इस कदर घिर गया है कि चुनी हुई सरकार के अस्तित्व पर ही खतरा नजर आने लगा है। ऊर्जा घोटाले के एक पुराने मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की गिरफ्तारी का निर्देश ठीक उसी दिन जारी किया, जिस दिन ताहिर-उल कादरी के ऐलान पर लाखों की भीड़ इस्लामाबाद में संसद से थोड़ी ही दूर जिन्या एवेन्यू में इकट्ठा हुई।

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यही नहीं कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे शख्स की गिरफ्तारी का निर्देश अभूतपूर्व है, यह भी कि दागदार राष्ट्रपति के बाद प्रधानमंत्री का भ्रष्टाचार वहां की लोकतांत्रिक सरकार के बारे में बहुत कुछ कह देता है। क्या यही वजह है कि भ्रष्टाचार और सरकारी काहिली के खिलाफ कादरी की पहल को वहां के आम नागरिकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है! विगत दिसंबर में लाहौर के मीनार-ए-पाकिस्तान में भी उनके समर्थन में भारी भीड़ जुटी थी।
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आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी करने के कारण इस्लाम के नरमपंथी बरेलवी स्कूल से जुड़े कादरी को यूरोप-अमेरिका ने कभी हाथोंहाथ लिया था, तो 2011 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाषण दे चुका कानून का यह विद्वान पिछले साल भारत दौरे पर भी आया था। इसके बावजूद चुनाव के चार महीने पहले लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने की कादरी की योजना संदेह पैदा करती है, तो केवल इसलिए नहीं कि इस्लाम के मानवीय चेहरे के इस प्रचारक की पीठ पर पश्चिम का हाथ हो सकता है।
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बल्कि सवाल यह भी है कि पाकिस्तान में दो बार चुनाव लड़ चुके कादरी आज सियासत नहीं, रियासत बचाओ  का नारा लगाते हुए अचानक राजनेताओं के खुले विरोध पर क्यों उतर आए हैं! उनके अभियान को न्यायपालिका और सेना का जिस तरह समर्थन प्राप्त है, उससे लगता है कि लोकतंत्र को विफल करने के लिए कहीं उस तरह उनका इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा, जिस तरह इमरान खान का किया जा रहा था! पाकिस्तान में इस तरह के विकल्पों की बात पहले भी की जाती रही है, इसलिए न तो मौजूदा घटनाक्रम वहां के लिए कोई उम्मीद जगाता है, न ही सीमा के इस पार यह खुश होने का कोई अवसर है।

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