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तूड़ा, भूसा जलाने पर मिलेगी सजा

Sat, 19 Apr 2014 01:00 AM IST
fatehabad
fatehabad Updated Sat, 19 Apr 2014 01:00 AM IST
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जिलाधीश एवं उपायुक्त डीके बेहरा ने एक आदेश जारी कर सूखा भूसा, तूड़ा (गेहूं, सरसों, पैड़ी आदि) को ईंट भट्ठों में जलाने व फैक्टरी में गत्ता बनाने के लिए प्रतिबंध कर धारा 144 लागू कर दी है।

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इसके साथ-साथ एक अन्य आदेश में गेहूं की फसल की कटाई के बाद बचे उसके अवशेषों को जलाने पर भी प्रतिबंध लगाते हुए धारा 144 लागू की है। उन्होंने बताया कि ईंट भट्ठों व गत्ता फैक्टरी में तूड़ा, भूसा, गेहूं, पैड़ी, सरसों आदि को ईंट पकाने व गत्ता बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, जिससे पशुओं के लिए सूखे चारे की कमी हो सकती है।
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भविष्य में वर्षा न होने से यह स्थिति और भी भयानक हो सकती है। इसलिए सूखे चारे की सूखा प्रभावित स्थलों पर आवश्यकता हो सकती है।  बेहरा कहना है कि जिला में गेहूं की फसल की कटाई के बाद उसके अवशेषों को जला दिया जाता है।
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इन अवशेषों के जलने से होने वाले प्रदूषण से मनुष्य के स्वास्थ्य, सम्पति की हानि, तनाव, क्रोध तथा जीवन को बाहरी खतरे की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि इन अवशेषों को जलाने की बजाय अवशेषों से पशुओं के लिए तूड़ी बनाई जाए। अवशेषों के जलने से चारे की कमी भी हो जाती है।


आदेशों का दृढ़ता से पालन किया जाए और उनकी अवहेलना न हो इसके लिए दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत वायु एवं प्रदूषण नियन्त्रण अधिनियम 1981 के तहत दण्ड का भागी होगा।

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