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जिम्मेदारी से बचने की कोशिश

Tue, 22 Jul 2014 02:34 PM IST
अमर उजाला/नई दिल्ली
अमर उजाला/नई दिल्ली Updated Tue, 22 Jul 2014 02:34 PM IST
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Try to avoid responsibility

लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में एक युवती के साथ हुई बर्बर घटना सिर्फ पुलिस रोजनामचे में दर्ज होने वाले आंकड़ों की पुनरावृत्ति भर नहीं है। मगर राज्य सरकार और पुलिस, लगता है कि इस घटना को सिर्फ एक और आंकड़ा मानकर ही चल रही हैं।

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राज्य में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का यह बयान कि 21 करोड़ की आबादी वाले राज्य में हर अपराध को रोका नहीं जा सकता, न केवल गैरजिम्मेदाराना है, बल्कि उनकी बौखलाहट को ही प्रदर्शित करता है।
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वाकई पुलिस हर जगह मौजूद नहीं रह सकती, मगर उस युवती का शव जिस हालत में मिला, उसी से पता चलता है कि उसके साथ कैसी पाशविकता की गई होगी। यदि यह मान भी लिया जाए कि हमलावर उसका परिचित था, तो क्या उसका अपराध कम हो जाता है?
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सवाल यह नहीं है कि इस अपराध में एक व्यक्ति शामिल था या चार-पांच, असल मुद्दा है कि क्या अपराधियों के मन में कानून व्यवस्था का कोई भय नहीं रहा?

ऐसा नहीं है कि महिलाओं के साथ ज्यादती की घटनाएं सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही हो रही हैं। बंगलूरू में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना बताती है कि महिलाएं हों या बच्ची, कोई भी कहीं भी सुरक्षित नहीं है।

ऐसा लगता है कि दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद बने कड़े कानून के बावजूद स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है। यह भी गौर करने की बात है कि ऐसी घटनाओं के सामने आने के बाद मामले को रफा-दफा करने की कोशिशें शुरू हो जाती हैं।

ऐसी घटनाओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट काफी अहमियत रखती है, क्योंकि यदि प्राथमिकी कमजोर रही, तो मामले की तह तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

आखिर बदायूं के कटरा सआदतगंज में दो बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस के रवैये के कारण ही जांच का जिम्मा सीबीआई को देना पड़ा। मगर वह जांच कर पाए, उससे पहले उनके शव जहां दफनाए गए थे, वह इलाका गंगा की बाढ़ में डूब गया!


वास्तव में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है और इसमें पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

जाहिर है, पुलिस तंत्र को मजबूत किए बिना हम बेहतर व्यवस्था की उम्मीद नहीं कर सकते, मगर इसके लिए सबसे पहला कदम पुलिस को राजनीतिक दुरुपयोग से बचाने की दिशा में होना चाहिए। क्या अखिलेश सरकार इसके लिए तैयार है?

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