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सामाजिक सुरक्षा की दिशा में
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 10 May 2015 07:21 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में बीमा और पेंशन से जुड़ी जिन तीन योजनाओं की शुरुआत की है, वे आने वाले दिनों में सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। इनमें से दुर्घटना और जीवन बीमा योजनाओं का लाभ तो मामूली प्रीमियम देकर कोई भी उठा सकता है, जबकि अटल पेंशन योजना असंगठित क्षेत्र के उन असंख्य लोगों के लिए है, जो किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना का हिस्सा नहीं हैं।
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देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की तादाद ज्यादा है, जो हाड़तोड़ मेहनत करते हैं, पर न उनके बूढ़े होने पर पेंशन की व्यवस्था है, न दुर्घटनाग्रस्त होने पर सरकार की तरफ से इलाज का प्रबंध है, न उनकी मृत्यु पर उनके परिजनों को आर्थिक सहायता मिलती है। आर्थिक महाशक्ति के तौर पर भारत के उभरने और दुनिया भर में छा जाने की बातें खूब की जाती रही हैं, पर खासकर गरीबों को सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में कभी ठोस कदम नहीं उठाया गया, जबकि पश्चिमी देशों में सामाजिक सुरक्षा में कटौती ही कई बार सरकारों के चुनाव हारने की वजह बन जाती है। हालांकि अभी नहीं मान सकते कि इन योजनाओं की शुरुआत कर देने भर से हमारे यहां सामाजिक सुरक्षा का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। पर कम से कम एक शुरुआत तो हुई है।
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कह सकते हैं कि नरेंद्र मोदी ने इस योजना के उद्घाटन के लिए पश्चिम बंगाल को इसलिए चुना, क्योंकि वहां अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। पर प्रति व्यक्ति आय और बचत के मामले में बहुत पीछे रहने वाले पश्चिम बंगाल से इन योजनाओं की शुरुआत करने का प्रतीकात्मक महत्व भी है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि इन तीनों योजनाओं को बैंक खाते से जोड़े जाने के कारण देश में बीमा और पेंशन का विस्तार होगा। तब तो और भी, जब जन-धन योजना ने खासकर गरीबों को बैंकों से जोड़ा है।
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लेकिन पश्चिम बंगाल की बात करें, तो खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह बताया है कि सूबे के कुल साढ़े तीन हजार ग्राम पंचायतों में से एक हजार पंचायतों में बैंक शाखाएं नहीं हैं! बड़ी आबादी की बैंकों तक पहुंच न होने के कारण ही वहां चिटफंड कंपनियों का जाल है। ऐसे में, पूरे देश में बैंकिंग नेटवर्क को सघन करने की दिशा में भी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को मिल सके।