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बड़े सुधार का समय

Fri, 27 Feb 2015 11:17 PM IST
संपादकीय
संपादकीय Updated Fri, 27 Feb 2015 11:17 PM IST
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time of big reform.

आर्थिक समीक्षा को संकेत मानें, तो राजग सरकार का पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली आज उन बड़े सुधारों की शुरुआत कर सकते हैं, जिनकी उम्मीद कारोबारियों और उद्योग जगत के साथ वैश्विक निवेशकों को भी है। समीक्षा में आर्थिक विकास दर आठ फीसदी से अधिक आंकी गई है, जो आधार वर्ष में संशोधन करने के बाद स्वाभाविक ही बेहद प्रभावी दिखती है। पर इस आकलन को इसलिए झुठला नहीं सकते कि स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर इसी के आसपास (7.9) न सिर्फ आंकी है, बल्कि उसने एशिया प्रशांत में भारत की आर्थिक संभावनाओं को सबसे चमकदार बताया है।

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समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक सुस्ती, मुद्रास्फीति की मार, राजकोषीय घाटे के बोझ, सिकुड़ती घरेलू मांग, भुगतान असंतुलन और कमजोर रुपये के चक्र से बाहर निकल आई है। इसकी बड़ी वजह निस्संदेह कच्चे तेल के दाम में आई भारी गिरावट है। पर हाल के दिनों में एनडीए सरकार ने भी डीजल की कीमत बाजार के हवाले करने, रसोई गैस सब्सिडी का नकद हस्तांतरण, कोयला खदानों की नीलामी के लिए अध्यादेश जारी करने, रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाने तथा वित्त आयोग की सिफारिश पर केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 10 फीसदी बढ़ाने जैसे कई आर्थिक सुधार किए हैं।
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चूंकि मानसून ठीक रहने का भरोसा है, और मौद्रिक नीतियों में लचीलापन दिखता है-ऐसे में, आर्थिक सुधारों की शुरुआत से सुस्त पड़े औद्योगिक क्षेत्र को भी गति मिलेगी। पर दो चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है-एक तो अर्थव्यवस्था के तमाम फंडामेंटल्स उस स्तर पर नहीं हैं, जिन्हें संतोषजनक कहा जा सके; भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर गतिरोध से खेती हतोत्साहित होगी, विदेशी निवेशकों के बीच भी गलत संदेश जाएगा। बड़े आर्थिक सुधारों के रोडमैप में क्या खेती-किसानी की कोई चिंता बजट में है?
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दूसरे, आर्थिक अनुशासन बनाए रखने के लिए खर्च और कर्ज, दोनों पर अंकुश लगाने की प्रतिबद्धता ठीक है, पर अनुत्पादक सब्सिडी को एक झटके में कम या खत्म करने का समर्थन नहीं किया जा सकता। यह गलत तर्क है कि सब्सिडी गरीबी से लड़ने का कारगर हथियार नहीं है। बड़े आर्थिक सुधार बेशक समय की मांग हैं, पर आज बजट पेश करते हुए अरुण जेटली को तनिक टूटते शेयर बाजार का भी ध्यान रखना होगा।

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