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तो कड़वी हो जाएगी चीनी

Fri, 05 Apr 2013 11:48 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 05 Apr 2013 11:48 PM IST
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then sugar will be bitter

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति का चीनी को सरकारी नियंत्रण से आंशिक तौर पर मुक्त करने का फैसला आर्थिक सुधारों की दिशा में एक और कदम जरूर है, मगर इसे दूरगामी इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इससे गन्ना किसानों को कोई सीधा लाभ होता नहीं दिख रहा है। बल्कि अनुभव तो यह भी बताता है कि चीनी के दाम भी बाजार के हवाले करने से आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।

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यह फैसला सी रंगराजन समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रही मजबूत चीनी लॉबी के दबाव में लिया गया लगता है। इससे चीनी मिलों को ही सबसे अधिक फायदा होना है, क्योंकि एक तो उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए अगले दो वर्ष तक दस फीसदी लेवी नहीं देनी होगी, और दूसरा उन पर मासिक कोटे की बंदिश भी हटाई जा रही है।
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इसमें दो राय नहीं कि गन्ना और चीनी क्षेत्र में व्यापक सुधार की जरूरत है, मगर इसमें संतुलन तो होना चाहिए। मगर अब तक होता यह आया है कि हर फसल के समय गन्ना किसानों को वाजिब दाम के लिए आंदोलन करना पड़ता है। यह विडंबना ही है कि आज तक गन्ने के दाम को लेकर कोई संतुलित नीति ही नहीं बनाई जा सकी है।
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उचित एवं लाभकारी मूल्य प्रणाली (एफआरपी) या राज्य परामर्शित मूल्य (सैप) जैसी व्यवस्थाओं में घोर असंतुलन है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। इसके अलावा गन्ना किसानों को चीनी मिलों के साथ भुगतान की समस्या है, सो अलग।

रंगराजन समिति ने तो यह भी सिफारिश की है कि चीनी मिलें 15 किलोमीटर के दायरे से बाहर भी गन्ना खरीद सकेंगी। यदि इस पर भी अमल हो गया, तब तो गन्ना किसान पूरी तरह मिलों के भरोसे रह जाएंगे। इस पूरी व्यवस्था में एक बड़ी खामी गन्ना उत्पादक राज्यों और केंद्र सरकार के बीच समन्वय की कमी भी है।


इसके पीछे चीनी की आड़ में होने वाली सियासत भी कम जिम्मेदार नहीं है, जिसका असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी महाराष्ट्र तक देखा जा सकता है। यह फैसला सरकार के लिए बोझ ही साबित होने वाला है, क्योंकि पीडीएस की मद में दी जाने वाली चीनी की अतिरिक्त कीमत सरकारी खजाने से दी जाएगी, जिससे सब्सिडी का बोझ 3,000 करोड़ रुपये बढ़ जाएगा। आर्थिक सुधार आज की जरूरत हैं और सरकार की मजबूरी भी, लेकिन इसके लिए एकतरफा फैसले नहीं लिए जा सकते।

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