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सतर्क होने का समय
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 05 Sep 2014 08:33 PM IST
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अल कायदा के मुखिया अयमान अल जवाहिरी ने भारतीय उपमहाद्वीप में जेहाद शुरू करने से संबंधित जो वीडियो जारी किया है, उसे हम सिर्फ इस वजह से नजरंदाज नहीं कर सकते कि यह कमजोर पड़ते इस आतंकी संगठन की विवशता का उदाहरण है।
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यह तथ्य है कि आईएस के उभार के सामने अल कायदा अब खुद को कमजोर पा रहा है। सिर्फ उसकी जमीन ही नहीं छिन रही, बल्कि उसके संसाधनों के स्रोत भी सिकुड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी ड्रोन हमलों ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान में उसकी कमर भी तोड़ दी है। ऐसे में, अल कायदा को नया ठिकाना चाहिए और नए रंगरूट भी। जवाहिरी ने जिन नई जगहों पर जेहाद शुरू करने की बात कही है, उनमें म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देश तो हैं ही, जहां मुस्लिम कट्टरपंथी वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, भारत के तीन इलाकों-असम, गुजरात और कश्मीर को भी इनमें शामिल किया गया है, जहां मुस्लिम समुदाय की शोषित छवि बना दी गई है।
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इस अंदेशे को खारिज नहीं किया जा सकता कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी सरकार को अल्पसंख्यक विरोधी बताकर अल कायदा जैसा चरमराता आतंकी संगठन खुद को मजबूती से खड़ा करने के पैंतरे कस रहा हो। यह हमारे लिए चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि कुछ समय पहले कई भारतीय युवाओं के आईएस में शामिल होने की बात सामने आई थी। संभव है कि भारत को नया ठिकाना बनाने का इरादा जताते हुए अल कायदा के दिमाग में यह बात हो।
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आईएस को अब अल कायदा से भी खतरनाक आतंकी संगठन बताया जा रहा है; उसकी बढ़ती ताकत और स्तब्ध कर देने वाली क्रूरता को देखते हुए यह कहना गलत भी नहीं है। पर भारत में पैठ बनाने की कोशिश में अल कायदा ज्यादा सफल इसलिए हो सकता है, क्योंकि आईएसआई और लश्कर उसके मददगार साबित हो सकते हैं। लिहाजा आतंकी संगठनों के इरादों को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की जरूरत है।
साथ ही, देश में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की भी आवश्यकता है, ताकि बाहरी लोग हमारी कमजोरी को हमारे खिलाफ इस्तेमाल करने की चाल में सफल न हो पाएं।