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शिखर की ढलान

Fri, 22 Nov 2013 07:13 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 22 Nov 2013 07:13 PM IST
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The slope of the peak

तहलका पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ गोवा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बहुत संभव है कि उनकी गिरफ्तारी भी जल्द हो जाए, लेकिन एक युवा पत्रकार के यौन उत्पीड़न के मामले में उनके संस्थान का रवैया हैरान करने वाला रहा है। इस प्रकरण ने 12 वर्ष पूर्व तहलका के ऑपेरशन वेस्टलैंड के जरिये रक्षा सौदों में दलाली का मामला उजागर करने वाले तेजपाल का एक अलग ही चेहरा सामने लाया है।

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यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का नहीं है, बल्कि कार्यस्थल में मालिक और उसकी मातहत के बीच का भी है। तेजपाल ने छह महीने के लिए खुद को तहलका से अलग करने की सजा मुकर्रर की, उससे ही साफ है कि वह खुद और उनकी पत्रिका का प्रबंधन इस मामले को कितने हल्के में ले रहा था। वरना तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी बलात्कार के मामलों में खासी मुखर रही हैं।
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सवाल है कि विशाखा बनाम राजस्थान सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कार्यस्थल में महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए जो निर्देश दिए हैं, तहलका ने उनका पालन क्यों नहीं किया? क्या कानून और नैतिकता के मानदंड सिर्फ दूसरों के लिए हैं?
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इस बीच, एक और मामले ने सार्वजनिक जीवन की नैतिकता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। निश्चय ही तरुण तेजपाल और अपनी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों के कथित भ्रष्टाचार को लेकर आरोपों से घिरे अरविंद केजरीवाल के मामलों में कोई साम्य नहीं है। मगर यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि उच्च स्तर की नैतिकता का दावा करने वालों और लीक से अलग हटकर काम करने वालों का जीवन भी पारदर्शी होना चाहिए।

केजरीवाल और उनके साथियों ने जिस तरह की पारदर्शी और साफ-सुथरी राजनीति का वायदा किया और भ्रष्टाचार को अपने राजनीतिक अभियान का मुद्दा बनाया है, उसमें उनकी जिम्मेदारी कहीं बड़ी हो जाती है। चुनावी राजनीति के दौर में ऐसे आरोप नए नहीं हैं, लेकिन चूंकि केजरीवाल ने भ्रष्टाचार को ही बड़ा मुद्दा बनाने का दावा किया था, इसलिए उनसे अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं।


मगर जब ऐसे प्रतीक ध्वस्त होते हैं, तो उनके साथ आम लोगों का विश्वास भी दरकने लगता है। और यह महज संयोग है कि तरुण तेजपाल मानवीय कमजोरियों और नैतिकता के उसी कठघरे में खड़े हैं, जिसे उन्होंने अपनी चर्चित किताब अल्केमी ऑफ डिजायर (हिंदी में शिखर की ढलान नाम से प्रकाशित) के केंद्र में रखा था।

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