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योजना मंजूर नहीं, विभागों में तालमेल नहीं

Mon, 26 May 2014 01:32 AM IST
Jind
Jind Updated Mon, 26 May 2014 01:32 AM IST
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 बरसाती पानी की निकासी की योजना को मंजूरी नहीं मिलने और ड्रेनों की सफाई को लेकर तीन विभागों में आपसी तालमेल नहीं होने के कारण इस बार बरसात में शहर में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। शहर से बरसाती पानी की निकासी के लिए मुख्य नाला बस स्टैंड के पास रजवाहा नंबर सात के नीचे बनी छह किलोमीटर लंबी ड्रेन है। इस ड्रेन की सफाई नहंी होेने के कारण थोड़ी सी बरसात में जहां सड़कें तालाब बन जाती हैं, वहीं बरसात में क्या हाल होगा, यह सोचकर लोग चिंता करने लगे हैं। पानी निकासी का जिम्मा शहर में नगर परिषद और जनस्वास्थ्य विभाग का है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रेनों का जिम्मा सिंचाई विभाग के पास है। आपसी तालमेल से सफाई नहीं होने के कारण ड्रेन गंदगी से अटी पड़ी है। शहर में भूमिगत ड्रेनेज की सारी जिम्मेदारी जनस्वास्थ्य विभाग की है। विभाग का कहना है कि नगर परिषद के कारण ड्रेनेज व्यवस्था ठप हो जाती है। जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन भी मानते हैं कि शहर से बरसाती पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है।

यहां होता है जलभराव
शहर के कई निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या है। इसमें बाल भवन रोड, स्टेडियम, शिव कालोनी, एसडी स्कूल, गोहाना रोड, एसपी निवास से सफीदों बाईपास तक और रोहतक रोड के क्षेत्र शामिल हैं। शुक्रवार को हुई महज 12 एमएम बारिश से ही कई क्षेत्रों में पानी भर गया। इससे लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ी। बालभवन रोड पर हिंदू कालेज तक सबसे अधिक दिक्कत होती है। यहां तक की इसके साथ लगते गांधी नगर की गलियों में भी जलभराव रहता है।
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नाले अवरुद्ध, ड्रेन की सफाई नहीं
बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था जांचने के लिए अमर उजाला ने मुआयना किया। इस दौरान नई सब्जी मंडी, कुंदन सिनेमा, बाल भवन रोड सहित कई जगहों पर बरसाती और घरों के गंदे पानी की नालियां गाद से पटी मिली। वहीं रधाना गांव के साथ से निकलने वाली ड्रेन की भी सफाई नहीं हुई है। इससे बारिश के मौसम में होने वाली दिक्कत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बरसाती पानी निकास की नहीं व्यवस्था
असल में शहर से बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था प्रशासन नहंी कर पाया है। जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन एसएस दलाल के अनुसार इसके लिए एक 12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन इसे फिलहाल सरकार की मंजूरी नहीं मिली है। सीवरेज व्यवस्था से ही शहर का बरसाती पानी निकाला जाता है। शहर में लगे सात पंप इस पानी को हांसी रोड पर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाते हैं।

नई ड्रेन से उम्मीद
जनस्वास्थ्य विभाग को बस स्टैंड के साथ से करीब छह किलोमीटर लंबी बनी नई ड्रेन से काफी उम्मीद है। विभाग के एक्सईएन के अनुसार इस बार बारिश का पानी इस ड्रेन से निकाला जाएगा। ड्रेन से शहर के अधिकतर हिस्सों पानी भिवानी रोड पंप तक पहुंच जाएगा। यहां से इसे हांसी रोड स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचा दिया जाएगा। यह ड्रेन पहली बार चालू की जाएगी, इसमें कितनी सफलता मिलती है, यह देखना होगा।


केवल भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम को ही जनस्वास्थ्य विभाग संभालता है। खुली नालियों की देखरेख और सफाई नगर परिषद को करनी होती है, लेकिन नगर परिषद इन नालियों का पानी सीवरेज में डाल देता है। इससे सीवरेज में पॉलिथीन और अन्य कचरा फंस कर सारी व्यवस्था को खराब करता है। वैसे शहर में बरसाती पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन फिर भी सात पंप सैट की मदद से सारे पानी की निकासी की जाएगी।
                                                                                                                                                            डीएस दलाल, एक्सईएन जनस्वास्थ्य विभाग


अवरुद्ध ड्रेन तीन गांवों के किसानों पर पड़ रही है भारी
 अवरुद्ध ड्रेन तीन गांवों के सैकड़ों किसानों पर भारी पड़ रही है। ड्रेन की सफाई नहीं होने और बरसाती पानी की निकासी नहीं होने से शामलो कलां, खिमाखेड़ी और पड़ाना गांव की करीब 2000 एकड़ में खड़ी करोड़ों रुपये की फसल पानी में डूब कर खराब हो जाती है। प्रशासन की लापरवाही के चलते किसान आफत में है। किसानों ने पड़ाना ड्रेन की खुदाई करवाकर सफाई करने की मांग प्रशासन से की है।
पड़ाना ड्रेन शामलो कलां गांव में सुंदर ब्रांच नहर के पास आकर समाप्त हो जाती है। दर्जनों गांवों का बरसाती पानी शामलो कलां गांव में जमा हो जाता है। ड्रेन से इस पानी को निकालने के लिए गांव में सुंदर ब्रांच नहर पर पंप लगाएं गए हैं जो पानी को नहर में डालते हैं। पड़ाना ड्रेन में रामकली ड्रेन के अलावा कई ड्रेनों का पानी भी आता है। शामलो कलां और पड़ाना गांव के बीच यह ड्रेन अवरुद्ध हो चुकी है। ड्रेन में मिट्टी से अटी हुई है। ड्रेन में घास-फूस और झाड़ियां पर उगी हुई है। रामकली ड्रेन की गहराई पड़ाना ड्रेन से अधिक है। रामकली ड्रेन की सफाई भी हो चुकी है। पड़ाना ड्रेन मिट्टी से व घास-फूस और झाड़ियों से अटने के कारण अवरुद्ध हो चुकी है। पड़ाना ड्रेन अवरुद्ध होने के कारण रामकली ड्रेन का पानी भी खेतों में जमा हो जाता है। किसानों का कहना है कि सुंदर ब्रांच नहर से पड़ाना गांव तक इस ड्रेन की खुदाई करने की जरूरत है। पड़ाना ड्रेन की खुदाई करने के बाद ही रामकली ड्रेन का पानी इस ड्रेन में आ सकता है। पानी की निकासी नहीं होने के कारण तीनों गांवों के दो हजार एकड़ में खड़ी फसली डूब जाती है।


अधिक पानी में पंप सेट भी दे जाते हैं जवाब
पड़ाना ड्रेन और रामकली ड्रेन के अलावा दर्जनों ड्रेनों का पानी शामलो कलां गांव में जमा हो जाता है। बरसात के इस पानी को पंपों की सहायता से सुंदर ब्रांच नहर में डाला जाता है। मानसून की बरसात होने पर पानी की निकासी के लिए बनाए पंप भी जवाब दे जाते हैं। यह पंपों पर रखी मोटर बिजली से चलती है। बिजली भी कम आती है। इस कारण पानी की निकासी आगे नहीं हो पाती है और पानी खेतों में चलता जाता है।


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