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दस साल बाद आई फैसले की घड़ी

Tue, 10 Jun 2014 01:15 AM IST
rewari
rewari Updated Tue, 10 Jun 2014 01:15 AM IST
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दस साल बाद आई फैसले की घड़ी
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दस साल पहले अवैध रूप से एक व्यक्ति को हिरासत में रखने के मामले में कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुना दिया है। अदालत ने थाना प्रभारी रहे एसआई तथा दो पुलिसकर्मियों समेत चार ग्रामीणों पर पांच- पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। दो ग्रामीणों की मौत हो चुकी हैं। यह मामला वर्ष 2004 का है।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजीत भारद्वाज ने बताया कि गांव बेरली कला निवासी राकेश पुत्र जगदीश को जाटूसाना पुलिस 13 मई 2004 की रात में घर से उठा कर थाने लेकर आई थी। आरोप है कि वहां पर पुलिस  ने उसकी पिटाई की थी इस कारण पीड़ित को एक माह तक अस्पताल में उपचार कराना पड़ा था।
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इस पूरे प्रकरण में जिस प्रकार से राकेश को टॉर्चर किया गया उसमें उसने अपने ही गांव के चार लोगों को नामजद कराया था, लेकिन पुलिस ने उस समय न तो उसका मेडिकल होने दिया और न ही उसकी शिकायत ली थी। गांव के कुछ लोगों ने जिला चिकित्सा अधिकारी से मिलकर उसका मेडिकल कराया था, लेकिन मेडिकल के बाद भी पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद पीड़ित ने एक इस्तगासा कोर्ट में डाल कर न्याय के लिए प्रार्थना की। कोर्ट के आदेश पर यह मामला दर्ज किया गया था।
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सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने नामजद आरोपी निवर्तमान थाना प्रभारी जाटूसाना एसआई अमीलाल, एएसआई रमेश, कांस्टेबल कर्ण सिहं के अलावा गांव बेरली कलां निवासी राजेश और नरेश पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।


इसी गांव के दो आरोपियाें रामकिशन और अनिल पर भी पुलिस से मिलकर उसकी पिटाई कराने का आरोप था, लेकिन फैसला आने से पूर्व ही उनकी मौत हो चुकी है। पीड़ित राकेश का कहना है कि वह इस जुर्माने से संतुष्ट नहीं है। वह न्याय पाने के लिए मामले को ऊपरी अदालत में लेकर जाएगा।
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