टेक्नोलॉजी जिसने बैंकिंग को बनाया स्मार्ट और आपको भी
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देश में 250 साल पहले पारंपरिक ढंग से शुरू हुई बैंकिग की सुविधा नई तकनीक के आने से बिल्कुल नया अंदाज ले चुकी है। बैंक में जाकर लंबी कतारें लगना अब बीते दिनों की बात है, अब हर शख्स की जेब में अपना बैंक है और वो जब चाहे तब रकम को अपनी मर्जी से इधर-उधर कर सकता है। कुल मिलाकर तकनीक ने बैंकिग सेक्टर में हर आदमी को आत्मनिर्भर बना दिया है। तकनीक बदलने से कैसे बैंकिंग बदली, इस पर विस्तार से निगाह डालेंगे।
भारत में बैंकिंग सेक्टर का इतिहास करीब 250 साल पुराना है। बात तब कि जब वर्ष 1770 में बैंक ऑफ हिंदुस्तान को कलकत्ता में स्थापित किया गया। इसके बाद कई और तरह के भी बैंक खुलते रहे। इसी बीच वर्ष 1886 में कलकत्ता में जनरल बैंक ऑफ इंडिया आस्तित्व में आया। वहीं तब तक बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास ने भी अपना काम बढ़ा लिया था। बाद में बैंक ऑफ बॉम्बे और बैंक ऑफ मद्रास को वर्ष 1921 में आपस में मिला दिया गया। दोनों बैंकों के विलय के बाद ही इंपीरियल बैंक अस्तित्व में आया और वर्ष 1955 में यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बन गया।
इसके बाद भारतीय बैंकिंग सिस्टम का एक नया रूप देखने को मिला। वर्ष 1969 में बैंकों को राष्ट्रीयकृत बैंक बनाने को लेकर इंदिरा गांधी सरकार ने बड़े निर्णय लिए। वहीं उदारीकरण के दौर में वर्ष 1991 के बाद बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों को अच्छी से अच्छी सुविधा देने का दौर शुरू हुआ। इसके साथ ही इंटरनेट ने भी दुनिया में कदम रख दिए थे। कम संख्या में उपयोग किए जाने के
बाद भी वैश्विक स्तर पर इंटरनेट के उपयोग से बैंकिंग सेक्टर को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलती दिख रही थी।
नए जमाने की बैंकिंग की शुरुआत
बैंकों में रुपए निकालने के लिए लगने वाली लंबी-लंबी लाइनों से छुटकारा दिलाने के लिए भारत में सबसे पहले निजी क्षेत्र के विदेशी बैंक एचएसबीसी ने मुंबई में वर्ष 1987 में पहला एटीएम खोला था। पर दुनिया में पहला एटीएम वर्ष 1969 में दुनिया को मिल चुका था। क्योंकि वर्ष 1969 में दुनिया को पहला बिजनेस एटीएम वर्ष 1969 में अमेरिका में खुल गया था।
भारत में इंटरनेट बैंकिंग शुरू करने वाला पहला बैंक आईसीआईसीआई बना। वहीं सरकारी क्षेत्र के बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने सबसे पहले भारत में क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी थी।
इसके साथ ही एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड के जरिए लोगों तक पैसे की पहुंच आसानी से हो गई। पहले जहां रुपए निकालने और भेजने के लिए लोगों को काफी समय खराब करना पड़ता था। एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसा निकालना-भेजना दोनों आसान हो गया।
आरबीआई के गवर्नर आर रघुराम राजन ने भारतीय रिजर्व बैंक की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा था कि टेक्नोलॉजी का उपयोग भी उन दिनों की तुलना में काफी बढ़ गया है जब खाते हाथ से बहियों में दर्ज किए जाते थे और यूनियनें कंप्यूटर शब्द के प्रयोग मात्र से ही हड़ताल करने लगती थी। आज हालत यह है कि कुछ बैंकों ने अपने ग्राहकों को मोबाइल फोन पर ही अपने सारे बैंकिंग लेनदेन करने की अनुमति दे दी है, अब शाखा में प्रवेश किए बिना और कलम से कुछ लिखे बिना ही सारा काम हो जाता है।
टेक्नोलॉजी के आने से पेपरलैस बैंकिंग ने भी जोर पकड़ा है। आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से टेक्नोलॉजी ने पेपरलैस बैंकिंग को बढ़ावा दिया है।
इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन बैंकिंग टेक्नोलॉजी की 'टेक्नोलॉजी इन बैंकिंग' नाम से जारी रिपोर्ट में यह बात साबित हो जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के 27 बड़े और छोटे बैंकों ने अपनी बैंकिंग टेक्नोलॉजी को मजबूत बनाने के लिए वित्त वर्ष 2013-14 में कुल 14,890 करोड़ रुपए का निवेश किया है। रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वर्ष तक 2013 भारत में मोबाइल बैंकिंग का प्रयोग करने वालों की संख्या 5.49 करोड़ रुपए पहुंच गई थी।
टेक्नोलॉजी ने कुछ इस तरह से बैंकिंग को बदला कि पेपर बेस्ड होने वाले फंड ट्रांसफर को इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर से पिछाड़ दिया है। वर्ष 2013 में पेपर बेस्ड फंड ट्रांसफर करीब 1,02,137 करोड़ रुपए का हुआ, जबकि इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर 1,44,720 करोड़ रुपए का हुआ जोकि पेपर बेस्ड फंड ट्रांसफर से कही ज्यादा था।
आइए जानते हैं कौन-कौन सी बैंकिंग टेक्नोलॉजी ने हमें और आप को स्मार्ट बनाने के साथ बैंकिंग को भी बहुत सरल बना दिया है।
ग्रीन चैनल बैंकिंग और एटीएम
ग्रीन चैनल बैंकिंग-भारतीय स्टेट बैंक समेत कई बैंक ने पेपरलैस बैंकिंग को खत्म करने के साथ-साथ बहुत ही कम समय में एक खाते से दूसरे खाते में रुपए भेजने के लिए नए-नए विकल्पों को अपने ग्राहकों के लिए पेश किया। ग्रीन बैंकिंग उन्हीं में से एक है।
ग्रीन चैनल बैंकिंग में एक स्वाइप मशीन में आपको जिस खाते में पैसे भेजने है उसका खाता नंबर और भुगतान की जाने वाली राशि की जानकारी मात्र देनी होती है। आप इधर बैंक में कैश पैसा जमा करते हैं और उधर संबंधित खाते में पैसा जमा हो जाता है। आपको इस प्रक्रिया में कलम और कागज का प्रयोग तक नहीं करना पड़ता है।
एटीएम-शुरुआत के समय में एटीएम से सिर्फ रुपए निकाले जा सकते थे। पर एटीएम के जरिए किसी के भी खाते में रुपए भेजे जा सकते हैं। साथ ही कई बैंकों ने एटीएम के जरिए रुपए जमा करने की भी सुविधा शुरू कर दी है। सबसे अच्छी बात है कि आपको इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए किसी समय विशेष का इंतजार नहीं करना होगा।
किसी भी समय और किसी भी एटीएम से जाकर आप रुपए का भुगतान कर सकते हैं। एटीएम के जरिए किसी के खाते में भुगतान करने के लिए रुपए भेजने वाले का और रुपए पाने वाले खाता सामान बैंक में होना चाहिए।
मोबाइल बैंकिंग से बैंकिंग कॉरस्पोंडेट तक
मोबाइल बैंकिंग-स्मार्ट फोन के आने से बैंकिंग भी स्मार्ट हो गई है। नई टेक्नोलॉजी और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से अब मोबाइल को ही ग्राहक का बैंक बनाने की योजना पर काम चल रहा है। टेक्नोलॉजी फ्रेंडली लोग आसानी से मोबाइल को ही अपना बैंक बना चुके हैं। मोबाइल बैंकिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंक इसके लिए लगातार अपनी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर रहे हैं।
इस कड़ी में बैंकों ने आईओएस, एंड्रायड फोन के लिए अलग-अलग ऐप लांच किए हैं। यह ऐप टेक्नोलॉजी फ्रेंडली लोगों में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। मोबाइल बैंकिंग सीधे अपने बैक के ऐप के जरिए आप फंड ट्रांसफर, बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल रिचार्ज, ट्रेन बुकिंग से होटल बुकिंग तक सब कुछ कर सकते हैं।
बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट- कई बैंकों ने लोगों की सुविधाओं के लिए बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट एजेंट नियुक्त किए है। संबंधित बैंक, बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट बनने वाले एजेंट को यह मंजूरी प्रदान करते है कि वह लोगों के पैसे एक खाते से दूसरे खाते में भेज सके। साथ ही लोगों को बैंकिंग सेवाओं से बारे में स्पष्ट तौर पर बता और समझा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरों में श्रमिकों, कामगारों और कम पढ़े लिखे लोगों के बीच में बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट काफी अहमियत पाते हैं। लोगों को रुपए जमा करने या फिर कही बाहर भेजने से लेकर खाता खोलने तक में लोगों की मदद करते हैं। यह बैकिंग कॉरस्पोंडेंट घर के पास का किराना स्टोर या अन्य काम करने वाला भी हो सकता है। इस काम के लिए बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट का कमीशन तय होता है। एक खाते से दूसरे खाते में भेजने और रुपए जमा करने पर बैंक की तरफ से निर्धारित शुल्क यह बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट लेते हैं।
एनईएफटी-आरजीटीएस ने दी बैंकिंग का हाई स्पीड रफ्तार
एनईएफटी-आरजीटीएस-नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर(एनईएफटी) और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरजीटीएस) ऐसी सुविधा है जिसकी मदद से व्यक्तिगत स्तर पर, कंपनी और फर्म एक बैंक से दूसरे बैंक में आसानी से पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं।
इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के आपस में मिलने से ऐसी टेक्नोलॉजी को ईजाद किया जा सका। आरबीआई की वेबसाइट के साथ इंटरनेट बैंकिंग यूज करने वाले लोग अपनी बैंक की वेबसाइट पर एनईएफटी और आरजीटीएस सुविधा वाली बैंक शाखाओं की पूरी लिस्ट देख सकते हैं। इस सुविधा के तहत भारत के अंदर कहीं भी और किसी भी समय पैसे का ट्रांसफर किया जा सकता है।
पर विदेशों में इस सुविधा के जरिए पैसा भेजना अभी संभव नही है। कई बैंक अपनी सुविधा के अनुसार लाखों रुपए तक के फंड ट्रांसफर की सुविधा दे रहे हैं। इसके लिए बैंक ग्राहकों से कुछ रुपए का शुल्क भी वसूल करते हैं।
विदेशों से पैसा पाने का आसान तरीका वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर
पूरी दुनिया भर में एक देश से दूसरे देश में पैसा भेजने का सबसे बेहतरीन विकल्प वेस्टर्न यूनियन ही है। वेस्टर्न यूनियन का नेटवर्क ही उसकी खासियत है। 200 से ज्यादा देशों में इसका नेटवर्क है। दुनिया में आप कहीं भी हों, पर 24 घंटे में कहीं भी और किसी को भी आप पैसा भेज सकते हैं। खाड़ी देशों और विदेशों में काम करने वाले भारतीय इस सेवा का बहुत लाभ उठाते हैं।
वेस्टर्न यूनियन का समझौता कई बैंकों के साथ है। भारत के कई बैंक वेस्टर्न यूनियन के लिए एक बैंकिंग एजेंट की तरह काम करते हैं। अगर आप अमेरिका से भारत पैसे भेजना चाहते हैं तो आप वहां डॉलर में वेस्टर्न यूनियन के एजेंट के पास पैसे जमा करेंगे और भारत में जिसके खाते में आपने पैसे भेजे हैं। उसके खाते में रुपए आ जाते हैं। इसके लिए बैंक कुछ शुल्क भी वसूल करते हैं।
वहीं वेस्टर्न यूनियन ने इससे आगे बढ़ते हुए अब एक देश से दूसरे देश में मोबाइल मनी ट्रांसफर की सुविधा भी दे दी है। इंटरनेट बैंकिंग से एक कदम आगे बढ़ते हुए सीधे एक देश से दूसरे देश में मोबाइल बैंकिंग के जरिए मोबाइल फंड ट्रांसफर किया जा सकता है। इस सुविधा को एम वॉलेट नाम से भी जानते हैं। इस सुविधा के जरिए एम वॉलेट में आने वाले पैसे से आप बड़े-बड़े स्टोर्स से सामान खरीद सकते हैं। अपनी यात्राओं के लिए पैसे का भुगतान कर सकते हैं। साथ ही पैसे भी निकाल सकते हैं।
इसका लाभ उठाने के लिए कई मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर आपको यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं। कई मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर वेस्टर्न यूनियन के साथ मिलकर आपको मोबाइल मनी ट्रांसफर की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। यह मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर आपको एम वॉलेट की सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं। मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर आपके फोन एकाउंट को एम वॉलेट से जोड़ देते हैं जिसके जरिए आप पैसे जमा और निकाल दोनों सकते हैं।
मोबाइल मनी ट्रांसफर में सिर्फ उन्हीं मोबाइल पर फंड ट्रांसफर किया जा सकता है जो मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर और वेस्टर्न यूनियन के साथ जुड़े होते हैं। इस सुविधा की खासियत यह भी है कि पैसे भेजने वाले के पास मोबाइल का होना जरूरी नहीं है।
इलेक्ट्रॉनिक तौर पर ही पैसे का भुगतान
नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस (एनएसीएच)- नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस सर्विस को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया देखती है। इस सुविधा के लिए ईसीएस पेमेंट के जरिए पूरे भारत भर में बड़ी-बड़ी राशि वाले भुगतान किए जाते हैं। यह भुगतान कई बार और बहुत अधिक संख्या में भी होते हैं। इस सुविधा को दिसंबर, 2012 से शुरू किया गया है।
इस सुविधा के जरिए इलेक्ट्रॉनिक तौर पर ही पैसे का भुगतान किया जाता है। होम लोन देने वाले बैंकों ने अब इस सुविधा का इस्तेमाल करना तेज कर दिया है। अब होम लोन लेन वाले ग्राहकों के खाते के जरिए सीधे ही पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाता है। इस सर्विस के शुरू होने के बाद बैंकों को एक फायदा और होता है कि वो कागजी प्रक्रिया से बच जाते हैं।
नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाऊस सर्विस का इस्तेमाल बड़े-बड़े लोन का आसानी से किया जाता है। ट्रांसपेरेंसी और सुरक्षा के साथ-साथ डाटा मैनेंजमेंट में यह सर्विस काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कोर बैंकिंग सॉल्यूशन(सीबीएस): कोर बैंकिंग सॉल्यूशन की सुविधा को पूरे देश भर में सभी बैंकों ने शुरु कर दी हैं। कोर बैंकिंग सॉल्यूशन के जरिए किसी भी शहर से अपने बैंक खाते को चालू रखा जा सकता है। मान लीजिए कि आपने आगरा में अपना खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में खोला। कुछ समय बाद आपको आगरा छोड़कर दिल्ली आना पड़ा। ऐसे में आपको बैंक ऑफ बड़ौदा में नया खाता खोलने की कोई जरूरत नहीं होगी। आप अपने पहले वाले खाते के जरिए ही दिल्ली में स्थित किसी भी बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा से पैसा निकाल सकते हैं और जमा कर सकते हैं। साथ ही दूसरी अन्य सेवाओं का भी लाभ उठा सकते हैं।
बैंकिंग का नया मजा मोबाइल ऐप बैंकिंग के साथ
एचडीएफएसी का चिल्लर एप-अचानक कई बार ऐसी परिस्थितयां बन जाती है कि आपको किसी को तुरंत किसी को पैसे ट्रांसफर करने होते हैं। ऐसे में या तो आपको बैंक की तरफ भागना पड़ता है या नेट बैंकिंग का सहारा लेना पड़ता है। पर अब इस स्थिति से निपटने के लिए एचडीएफसी बैंक ने एक नया मोबाइल ऐप पेश किया है। इस ऐप की मदद से अपने मोबाइल कॉन्टेक्ट्स में से किसी को भी चुटकियों में रुपए ट्रांसफर कर सकते हैं।
मोबाइल ऐप के जरिए बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए एचडीएफसी बैंक ने चिल्लर ऐप पेश किया था। एचडीएफसी का दावा था कि ये अपनी तरह की पहली एप है, जो ग्राहकों के बैंक अकाउंट से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ। इसके चलते आपको कुछ प्रीपेड राशि भरने की जरूरत नहीं है। इस ऐप में मोबाइल में कोई पासवर्ड सेव नहीं होता है। इसे M-PIN द्वारा एक्सेस किया जा सकता है, जो केवल ग्राहक को पता होता है।
पैसा ट्रांसफर करने पर कितना लगेगा टैक्स
एचडीएफसी के मुताबिक इस ऐप को बैंक ने कोच्चि की टेक्नोलॉजी फर्म 'मोबमी' के साथ मिलकर बनाया है। इस ऐप से आप देश में किसी को भी पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं। इस ऐप से फंड ट्रांसफर करने पर हर ट्रांजेक्शन पर 3.50 रुपए सर्विस टैक्स देना होगा।
अधिकतम कितना और कैसे कर सकते ट्रांजेक्शन
चिल्लर ऐप से आप अधिकतम 5,000 रुपए ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे आप एक दिन में 10 ट्रांजेक्शंस कर सकते हैं। चिल्लर से पैसे ट्रांसफर करने के लिए आपको अपना नाम, नंबर और ईमेल
आईडी देनी होगी। वहीं अन्य बैंक यूजर्स को इन डिटेल्स के अलावा अपना सात नंबर वाला मोबाइल मनी आइडेंटिटीफायर (एमएमआईडी), बैंक अकाउंट या ISFC कोड बताना होगा। एमएमआईडी कोड का प्रयोग इंटरबैंक फंड ट्रांसफर के लिए किया जाता है। एचडीएफसी के कस्टमर इस ऐप के सभी फीचर्स इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अन्य बैंक के यूजर्स फिलहाल इस एप से केवल पैसे
रिसीव कर सकते हैं।
एक्सिस बैंक का टच आईडी ऐप-देश के निजी क्षेत्र के तीसरे बड़े एक्सिस बैंक ने टच आईडी की पेशकश की है। इस मोबाइल एप्लीकेशन से लेनदेन एक टच के जरिए ही जांचा जा सकता है। साथ ही उसकी प्रमाणिकता को भी चेक किया जा सकता है। बैंक ने एप्पल 5 या उससे ऊपर सीरीज के फोन का उपयोग करने वाले ग्राहक अब अपने वित्तीय लेनदेन जैसे बिल का भुगतान, मोबाइल फोन रिचार्ज और फंड ट्रांसफर को इस फीचर के जरिए कर सकते हैं। इसके साथ ही बैंक ने एप्पल वाच के लिए भी बैंकिंग एप्लीकेशन पेश किया है।
ग्राहक को केवल एक्सिस मोबाइल एप्लीकेशन को उनके एप्पल वाच के साथ जोड़ना होगा जिससे वे बिना किसी अतिरिक्त वेरिफिकशन के अपने बचत खाते की जमा राशि, पिछले पांच लेनदेन का विवरण और नोटिफिकेशन आदि की जानकारी पा सकेंगे। इससे एटीएम लोकेशन की जानकारी भी हासिल की जा सकेगी।
एक्सिस बैंक के मुताबिक मोबाइल पर टच आईडी के उपयोग से इस तरह लेनदेन की संकल्पना को पेश करने वाला यह पहला बैंक है। जैसे-जैसे मोबाइल बैंकिंग के ग्राहकों की संख्या बढ़ रही है वैसे ही ये डिजिटल सोल्यूशंस गति पकड़ रहे हैं।
बिटकॉइन ऑनलाइन बैंकिंग का एक नया विकल्प
बिटकॉइन ऑनलाइन भुगतान का जरिया है। इसे डिजिटल या गुप्त मुद्रा का नाम भी दिया गया है। इसके लिए कोई केंद्रीकृत व्यवस्था नहीं है। लोग कठिन गणना और गुप्त कोडिंग के जरिए खुद अपनी मुद्रा जमा करते और फिर खर्च करते हैं। मुद्रा जमा करने को माइनिंग कहा जाता है। धन एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के बदले में एक मामूली फीस ली जाती है जो क्रेडिट कार्ड की तुलना में बहुत कम होती है। हालांकि क्रेडिट कार्ड के उलट इसमें खरीदार को ही यह फीस चुकानी होती है। हालांकि इसकी वैधता को लेकर भी दुनिया भर में एक विवाद है।
बिटकॉइन की शुरूआत वर्ष 2009 में हुई थी। माइक्रोसॉफ्ट ने बिटकॉइन के जरिए भी अपनी सेवाओं के लिए भुगतान लेना शुरू कर दिया है। इस वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल माइक्रोसॉफ्ट के खाते में धन जमा कराने के लिए किया जा सकता है। यह धन माइक्रोसॉफ्ट की सेवाओं पर खर्च किया जा सकता है।
वर्चुअल बटुए की चुनौती
एक्स बॉक्स के गेम्स, वीडियो, एप्स या फिर विंडोज फोन के लिए सेवाएं और माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए इस धन का इस्तेमाल हो सकता है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। लेकिन अपने ग्राहक सेवा पन्ने पर एक अलग पन्ना जोड़ दिया था जिसमें बताया गया था कि इस वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल कैसे माइक्रोसॉफ्ट पर किया जा सकता हैं।
फिलहाल बिटकॉइन्स का इस्तेमाल केवल अमेरिका के ग्राहकों के लिए ही है। इतना ही नहीं बिटकॉइन एक निश्चित धनराशि के लिए ही इस्तेमाल हो सकते हैं। बिटकॉइन धीरे-धीरे बाजार में अपने लिए जगह बना रहे हैं। अब पे-पाल, डेल, एक्सपीडिया और कई दूसरी कंपनियों ने इनके जरिए भुगतान लेना शुरू कर दिया है।