फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   team india again defeated at home ground

फिर घर में हारे

Mon, 07 Jan 2013 11:08 AM IST
Updated Mon, 07 Jan 2013 11:08 AM IST
विज्ञापन
team india again defeated at home ground

आखिरी मैच में रोमांचक ढंग से जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने बेशक पाकिस्तान को तीन-शून्य से सीरीज जीतने का मौका नहीं दिया, लेकिन इससे पूरी श्रृंखला में भारतीयों के लचर प्रदर्शन को ढका नहीं जा सकता। यकीन नहीं होता कि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अब पाकिस्तान से बुरी तरह हारने वाली इसी टीम ने करीब पौने दो साल पहले विश्व कप जीता था!

विज्ञापन


कप्तान मानें या न मानें, टीम की इस दुर्दशा में ट्वंटी-20 का बड़ा हाथ है। एक के बाद एक मैच में खासकर विराट कोहली, युवराज सिंह और सुरेश रैना की लगातार विफलताएं तो यही कहती हैं। उससे भी बड़ी समस्या अलबत्ता ओपनिंग बल्लेबाजी की विफलता है। ऐसे में एक समाधान यही हो सकता है कि सहवाग और गंभीर को बल्लेबाजी क्रम में नीचे ले आया जाए और उद्घाटक बल्लेबाजी की जिम्मेदारी नवोदितों को सौंप दी जाए। इसी तरह धोनी के फॉर्म को देखते हुए उन्हें क्रम में ऊपर ले आना एक अच्छा कदम हो सकता है।
विज्ञापन


समस्या सिर्फ यही नहीं है कि बल्लेबाजों में धैर्य और टिककर खेलने की मानसिकता नहीं रही, मुश्किल यह भी कि तीन-तीन कोचों के होते हुए टीम को पटरी पर लाने की कोई मौलिक या नवोन्मेषी सोच नहीं है। इसीलिए लगातार एक जैसे लचर खेल का परिचय भी किसी को परेशान नहीं करता। यह ठीक है कि मैदान पर कोच को नहीं, खिलाड़ियों को ही खेलना पड़ता है, लेकिन अभी तक डंकन फ्लेचर के साथ खिलाड़ियों के लगातार संवाद का न तो कोई सुबूत मिला है, न ही संकटग्रस्त टीम को उबारने का कोई रोडमैप ही कोच ने तैयार किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सच तो यह है कि बल्लेबाजी विफलता के बावजूद टीम इंडिया की असली मुश्किल गेंदबाजी में है। कप्तान भले ही भुवनेश्वर कुमार को इस शृंखला की खोज मानें, पर इसकी क्या गारंटी है कि एक दो-सीरीज के बाद वह विस्मृति में गुम नहीं हो जाएंगे या गेंदबाजी के दबाव से उनकी प्रतिभा-क्षमता प्रभावित नहीं होगी! सच तो यह है कि क्रिकेट के हमारे नीति-नियंताओं ने बेहतर गेंदबाज तैयार करने में कभी कोई रुचि नहीं दिखाई। इस हार के बाद भी अगर सबक नहीं सीखे गए, और उसके अनुरूप तैयारी नहीं की गई, तो इंग्लैंड से एक और पराजय हमारी प्रतीक्षा कर रहा होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed