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क्यों शुरू हो बातचीत

Sun, 04 Aug 2013 08:37 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sun, 04 Aug 2013 08:37 PM IST
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talk with pakistan

यह स्तब्ध करने वाली बात है कि दिल्ली में खुफिया सूत्रों को अफगानिस्तान स्थित भारतीय दूतावास को निशाना बनाने की योजना का पता चलता है, इस बारे में काबुल में राजदूत को आगाह किया जाता है, इसके बावजूद हमला हो जाता है।

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हालांकि यह हमला काबुल स्थित दूतावास पर नहीं, जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावास के सामने हुआ। यह भी सही है कि सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से आत्मघाती हमलावरों को पहले ही कार में विस्फोट करने पर विवश होना पड़ा, जिससे कुछ निरीह लोग और बच्चे मारे गए। लेकिन विस्फोट के बाद दूतावास के प्रवेश द्वार पर काफी समय तक हुई गोलीबारी से स्पष्ट था कि हमलावरों के निशाने पर कौन लोग थे।
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यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि अफगानिस्तान से अमेरिका के बाहर होने से पहले ही पाकिस्तान वहां भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए किस तरह आमादा है। बताया जाता है कि आईएसआई ने तालिबान के हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को अफगानिस्तान स्थित भारतीय दूतावास पर हमला करने के लिए पांच लाख रुपये की पेशकश की थी। इससे पहले तालिबान का यही धड़ा दो बार काबुल में भारतीय दूतावास पर भीषण हमलों को अंजाम दे चुका है।
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यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब भारत बड़ी आर्थिक मदद अफगानिस्तान को देने वाला था। इससे पूर्व अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण कार्य में हाथ बंटाकर भारत ने वहां के लोगों का प्यार और भरोसा जीता था। लेकिन अफगानिस्तान में अपना विध्वंसक खेल खेलने की योजना बनाता पाकिस्तान वहां भारत की मौजूदगी नहीं चाहता, इसीलिए वह जब-तब ऐसे हमलों को अंजाम देता है।

भारत के खिलाफ यह पाक आक्रामकता सिर्फ अफगानिस्तान में नहीं, बल्कि सीमा पर भी दिख रही है; हाल के दिनों में पाक सैनिकों द्वारा युद्धविराम का लगातार उल्लंघन इसी का सुबूत है। यह सब तब हो रहा है, जब पाकिस्तान में नवाज शरीफ की सरकार है, जिसे भारत के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाने के लिए जाना जाता है।


ऐसे में, इस्लामाबाद के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने की योजना पर हमारी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। जब तक पाकिस्तान हमारे खिलाफ साजिश करना बंद नहीं करता, तब तक उसके साथ बातचीत शुरू करने का औचित्य नहीं है।

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