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जलघर के फिल्टर में मिला दर्जी का शव

Fri, 09 May 2014 01:26 AM IST
bhiwani
bhiwani Updated Fri, 09 May 2014 01:26 AM IST
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जलघर के फिल्टर में मिला दर्जी का शव
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जलघर के फिल्टर में बृहस्पतिवार सुबह एक व्यक्ति का शव देखा गया। मृतक के मुंह से जहरीला पदार्थ खाए जाने के झाग निकल रहे थे। फिल्टर के पास पडे़ जहरीले पदार्थ के खाली पाउच से पुलिस कयास लगा रही है कि व्यक्ति ने पहले जहरीला पदार्थ निगला और पेट में जलन होने पर फिल्टर में छलांग लगाई।

जहां उसकी मौत हुई। परिजनों ने पुलिस को बताया कि वह पिछले कुछ दिन से तनाव में चल रहा था। पुलिस ने परिजनों के बयान पर इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई कर शव परिजनों को सौंप दिया।
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वाक्या बृहस्पतिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे का है। जनस्वास्थ्य विभाग के जेई ने सिविल लाइन थाना पुलिस को सूचना दी कि जलघर के फिल्टर टैंक में एक व्यक्ति का शव पड़ा है। इसके बाद कार्यकारी एसएचओ एसआई कुलदीप के नेतृत्व में पुलिस मौके पर पहुंची। फिल्टर टैंक में करीब छह इंच तक ही पानी था।
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पुलिस कर्मचारियों ने युवक की तलाश ली तो जेब से पैन कार्ड मिला। जिसके माध्यम से मृतक की पहचान जैन चौक वासी सुनील के रूप में हुई। पुलिस ने परिजनों को बुलाया और शव को टैंक से बाहर निकलवाया। टैंक के पास ही मृतक के कुछ कागज व जहरीले पदार्थ के कुछ पाउच पडे़ थे।

परिजनों ने बताया कि सुनील जैन चौक में ही टेलर्स की दुकान चलाता था। पिछले कुछ दिनों से वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था।
मृतक की पत्नी ज्योति ने बताया कि सुनील बृहस्पतिवार सुबह छह बजे घर से निकला था। दोपहर 12 बजे उन्हें सूचना मिली कि सुनील का शव टैंक में मिला है। उसे दो लड़के है। एसआई कुलदीप ने बताया कि सुनील ने पहले जहर निगला है। फिर वह पानी के लिए फिल्र में कूदा है। फिलहाल इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई कर शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।

नहीं थम रहा टैंकों में शव मिलने का सिलसिला
जलघर के टैंकों में शव मिलने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। 25 अप्रैल को जतिन व विशाल नामक दो दोस्तों के शव जलघर के टैंक नंबर तीन में पाए गए थे। उस समय भी जलघर के टैंकों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग उठी थी और जनस्वास्थ्य विभाग ने भी प्राइवेट सिक्योरिटी तैनात करने की बात कही थी।


बृहस्पतिवार को फिर से टैंक में शव मिलने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ खडे़ हुए है। वैसे हर साल जलघर के टैंकों में डूबने से किसी ना किसी की मोत होती है। पिछले चार-पांच सालों में दर्जनभर के करीब लोग जलघर के टैंकों में अपनी जान गवां चुके है।
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