फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Suspension of IAS Officer Durga Shakti Nagpal

इतनी सख्ती किसलिए?

Mon, 29 Jul 2013 08:38 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Mon, 29 Jul 2013 08:38 PM IST
विज्ञापन
Suspension of IAS Officer Durga Shakti Nagpal

गौतमबुद्ध नगर की युवा एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को उत्तर प्रदेश सरकार भले ही जायज ठहरा रही है, लेकिन जिस पृष्ठभूमि में ऐसा सख्त फैसला लिया गया वह संदेह पैदा करता है।

विज्ञापन


उन्हें निलंबित किए जाने का जो कारण बताया जा रहा है, उसके मुताबिक, उनके आदेश पर एक निर्माणाधीन धार्मिक स्थल की दीवार ढहा दी गई थी। निश्चित रूप से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि सर्वोच्च अदालत ने 2009 में आदेश जारी किया था कि कोई भी राज्य सरकार बिना पूर्वानुमति के किसी सार्वजनिक जगह पर किसी भी तरह का अवैध धार्मिक निर्माण न होने दे। इस पर अमल उतना ही जरूरी है, जितना किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना। मगर इस कदम के पीछे यदि रेत माफिया पर संदेह जताया जा रहा है, तो उसकी वजहें भी हैं।
विज्ञापन


असल में दुर्गा शक्ति ने अपनी पहली पदस्थापना के महज दस महीने के दौरान ही अवैध खनन माफिया के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान चला रखा था। उनकी पहल पर यमुना और हिंडन नदियों में हो रहे बालू और मिट्टी के अवैध खनन को रोकने के लिए न केवल बीस से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई, बल्कि दर्जनों वाहनों की जब्ती और अनेक लोगों की गिरफ्तारियां तक हुईं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सवाल है कि अक्सर ऐसा क्यों होता है कि जो अधिकारी जमीन, रेत, या तेल माफिया से टकराने की कोशिश करता है, उसे किसी न किसी बहाने से किनारे लगा दिया जाता है। इस तरह की कार्रवाई से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल कमजोर पड़ता है। आखिर हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का मामला हमारे सामने है ही, जिन्हें राबर्ट वाड्रा से जुड़ा जमीन सौदे का मामला सामने लाने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। बल्कि कुछ महीने पहले ग्वालियर में रेत माफिया से टकराने की वजह से एक जांबाज पुलिस अधिकारी को जान तक से हाथ धोना पड़ा था।


बहरहाल दुर्गा शक्ति के साथ बरती गई सख्ती के खिलाफ यदि सूबे का आईएएस संगठन खड़ा नजर आ रहा है, तो यह युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए एक बड़ी चुनौती है कि वह प्रशासनिक अमले को राजनीतिक शिकंजे से मुक्त करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed