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सुदीप्तो तो एक मोहरा है

Thu, 25 Apr 2013 09:10 PM IST
Updated Thu, 25 Apr 2013 09:10 PM IST
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sudipto sen charged with fraud in chit fund scam

पश्चिम बंगाल में एक चिटफंड कंपनी द्वारा लाखों गरीबों की गाढ़ी कमाई लूट लेने का प्रसंग जितना कारुणिक है, इसमें राजनेताओं की मिलीभगत के ब्योरे उससे अधिक चौंकाने वाले हैं।

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एक युवा नक्सली के अचानक बड़ा पूंजीपति बनने और एक महत्वाकांक्षी लड़की का उसी की कंपनी में रिसेप्शनिस्ट से कार्यकारी निदेशक बन जाने की कहानी फिल्मी लगती है, लेकिन सच है।
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हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक साम्राज्य ध्वस्त होने के बाद कंपनी के कर्ताधर्ताओं के सुदूर कश्मीर के सोनमर्ग में गिरफ्तार होने के बाद पता चलता है कि उनके काले धंधे में राजनेताओं से लेकर वकीलों और पत्रकारों तक की लिप्तता थी।
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तृणमूल के सांसदों-मंत्रियों ने सुदीप्तो सेन से उगाही करके उसकी कंपनी को पश्चिम बंगाल में सुरक्षा दी, तो असम में यही काम कांग्रेसी नेता कर रहे थे। पूर्वोत्तर में एक टेलीविजन चैनल की सौदेबाजी में वरिष्ठ वकील के तौर पर पी चिदंबरम की पत्नी का जिस तरह नाम आया है, वह तो स्तब्ध करने वाला है।

लिहाजा इस पूरे मामले की न सिर्फ गहन जांच, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए। अपना पैसा गंवा चुके गरीबों के सड़क पर उतरने, घोटाले में अपने नेताओं के नाम आने और पंचायत चुनाव में इसका प्रतिकूल असर होने की आशंकाओं के मद्देनजर ममता बनर्जी ने भुक्तभोगियों को हर्जाना देने की घोषणा की है।

पश्चिम बंगाल की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वहां निम्न मध्यवर्ग के लोग अपनी छोटी बचतों के लिए चिटफंड कंपनियों की शरण में जाते हैं। एजेंटों द्वारा दिन भर की मामूली बचत को भी जमा कर लेने, घर से ही पैसा ले जाने और बगैर गारंटी के बड़ा कर्ज देने के कारण लोग इन कंपनियों पर भरोसा करते रहे हैं। लेकिन अधिक पैसे का लालच देने वाली ऐसी ज्यादातर कंपनियां ठगी के खेल में शामिल हैं।

लिहाजा इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही छोटी बचतों को सुरक्षित रखने के लिए एक तंत्र बनाना भी जरूरी है; पड़ोसी बांग्लादेश में नोबलजयी मोहम्मद यूनुस यह काम बखूबी कर चुके हैं।


चूंकि यह मामला आर्थिक रूप से ध्वस्त एक राज्य के गरीबों के हित से जुड़ा है, इसलिए इसे आरोप-प्रत्यारोपों और बदले की राजनीतिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

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