फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   south sudan

दक्षिण सूडान

Fri, 20 Dec 2013 09:18 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Fri, 20 Dec 2013 09:18 PM IST
विज्ञापन
south sudan

दशकों के खून-खराबे के बाद दो वर्ष पूर्व ही नौ जुलाई, 2011 को सूडान से आजाद होने वाला दक्षिण सूडान एक बार फिर गृहयुद्ध की चपेट में है। इस संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और करीब बीस हजार से ज्यादा लोग घर-बार छोड़कर विभिन्न जगहों पर शरण लिए हुए हैं। प्राकृतिक संसाधनों, खासकर तेल समृद्ध इस देश को व्यापक संभावनाओं वाला माना जाता है और आजादी के बाद इसके खजाने में लगातार बढ़ोतरी ही हुई है।

विज्ञापन


विस्तृत चारागाह, दलदल और उष्णकटिबंधीय जंगलों वाले इस देश के लोगों की आजीविका का आधार लंबे समय तक खेती ही थी, लेकिन अब दक्षिण सूडान की अर्थव्यवस्था मुख्यतः तेल पर निर्भर है। यह अलग बात है कि तेल समृद्ध होने के बावजूद यह अफ्रीका का सबसे कम विकसित देश है। अनुमानतः पूर्व सूडान के तेल कुल भंडार का 75 फीसदी हिस्सा दक्षिण सूडान में आ गया है, जबकि रिफाइनरी एवं पाइपलाइन सूडान में हैं। दोनों देशों के बीच तेल राजस्व के बंटवारे को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं।
विज्ञापन


वैसे यहां तेल एवं सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर नस्लीय समूहों के बीच होने वाला झगड़ा भी चिंता का विषय है। भाषायी एवं नस्लीय विविधता वाले इस देश में आजादी के बाद इन झगड़ों के कारण सैकड़ों लोग मारे गए हैं और करीब एक लाख लोग विस्थापित हुए हैं। ताजा संघर्ष में भी नस्लीय झगड़े के संकेत हैं। डिंका, नुएर और सिलुक यहां के बड़े नस्लीय समूह हैं। बताया जाता है कि राष्ट्रपति सेल्वा कीर बहुसंख्यक डिंका समुदाय से हैं, जबकि वहां के पूर्व उपराष्ट्रपति रीक मेचार, जिसे कीर ने पद से हटा दिया, नुएर समुदाय से हैं। जानकारों के मुताबिक, दोनों समुदायों के बीच ताजा तनाव की मुख्य वजह यही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed