फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Son in law mess in politics

राजनीति का दामाद संकट

Thu, 01 Oct 2015 08:11 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Thu, 01 Oct 2015 08:11 PM IST
विज्ञापन
Son in law mess in politics

साधो, क्या हो जब बेटी का खाविंद ही बगावत पर आमादा हो जाए! ऐसे समय ससुर को काटो, तो खून नहीं। लालू और पासवान इन दिनों जबर्दस्त दामाद संकट झेल रहे हैं। पासवान जी के दामाद हालांकि अब मान गए बताते हैं। उन्होंने पासवान जी को पिता समान और चिराग को भाई समान बताया है। पर पल-पल बदलती राजनीति में ऐसी अस्थायी भावुकता पर कौन भरोसा करेगा? दामाद जब बगावत पर उतर आए, तब क्या करना चाहिए, इसका कोई बना-बनाया फॉर्मूला नहीं है। इन दिनों भारतीय राजनीति में दामादों की क्रांति का सिलसिला चल निकला है। राजनीतिक दामाद क्रांति करने पर आमादा हैं और ससुर हैं कि यह सब फटी आंखों देखने के लिए अभिशप्त हैं।

विज्ञापन


यदि तमाम असंतुष्ट दामाद एक हो जाएं, तो असंतुष्ट दामाद पार्टी का गठन किया जा सकता है। इस तरह की पहल हो, तो कुछ कमजोर किस्म के दामाद भी उससे जुड़ने का साहस कर सकते हैं। इसके लिए 'दुनिया के दामादो, एक हो’ का नारा बहुत प्रभावी रहेगा। शोध छात्रों के लिए भारतीय राजनीति में दामाद संकट’ या ’राजनीति में दामादों की क्रांति’ जैसे विषय निहायत मौजूं हो सकते हैं। वह दिन दूर नहीं, जब कवि 'दामाद पुराण’ की रचना करने लगें।
विज्ञापन


वे राजनेता इन दिनों घबराए हुए हैं, जिनके दामादों ने मौन व्रत धारण कर रखा है। बगावत संक्रामक रोग की तरह है। वह फैलती है, तो कइयों को अपनी चपेट में ले लेती है। इसलिए अनेक पार्टियों के नेताओं ने अपने दामादों पर गुप्त निगरानी रखनी शुरू कर दी है। नेहरू के समय से ही राजनीति में दामादों की आमद का सिलसिला शुरू हो गया था। एनटी रामाराव इसी दामाद राजनीति का शिकार हुए थे। पिछले दिनों कांग्रेस कुछ अलग तरह की दामाद बीमारी से पीड़ित रही। हमारे मनीषियों को अब भारतीय राजनीति के दामादीकरण पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। कहा जाता है कि दामाद बेटे के समान होता है। पर जब पूत कपूत निकल सकता है, तो दामाद कुदामाद क्यों नहीं हो सकता? क्या यह हक दामादों को नहीं मिलना चाहिए?
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed