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ताकि रुके यह बर्बरता
Updated Mon, 22 Jul 2013 04:08 PM IST
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तेजाब हमले पर सर्वोच्च न्यायालय के कठोर दिशा-निर्देश के दो दिन बाद मध्य प्रदेश के मुरैना में तेजाब फेंके जाने से एक महिला की मौत स्थिति की गंभीरता के बारे में ही बताती है।
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साफ है कि दंड का भय भी अब लोगों को अपराध से विरत नहीं कर पा रहा। इसकी एक वजह तो तेजाब की खुलेआम खरीद-बिक्री ही है। इसी वजह से टॉयलेट क्लीनर के रूप में इस्तेमाल होने वाले तेजाब का प्रयोग लड़कियों पर हमले के लिए बढ़ गया है।
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आंकड़ा बताता है कि देश में तेजाब हमले के सालाना औसतन एक हजार मामले सामने आते हैं। फिर तेजाब को हथियार की तरह इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कोई सख्त कानून भी नहीं है।
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जिस पर तेजाब फेंका जाता है, उसकी तो जिंदगी बर्बाद हो जाती है। पीड़िता अगर बच जाती है, तो चिकित्सा और प्लास्टिक सर्जरी में बेतहाशा खर्च होता है, पूरी जिंदगी जो जिल्लत-जलालत झेलनी पड़ती है, वह अलग।
दूसरी ओर, तेजाब फेंकने वालों को कई बार मामूली सजा ही मिलती है। ऐसे में, सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों को तीन महीने के भीतर तेजाब हमले को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध घोषित करने, इसकी खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने और पीड़िता का मुआवजा बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने का जो निर्देश दिया है, वह बिल्कुल सही है।
सरसरी तौर पर ऐसा लगता जरूर है कि तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने का लाभ नहीं मिलेगा।
मसलन, एक शहर में तेजाब खरीदकर दूसरे शहर में हमला करने या खरीदने के महीनों बाद तेजाब फेंकने पर अपराधी की शिनाख्त कैसे संभव है? ऐसे अपराधियों का तो पता भी नहीं चल पाएगा, जो बैटरी से तेजाब निकालकर हमलों को अंजाम देते हैं।
लेकिन बांग्लादेश में करीब एक दशक पहले बने एसिड कंट्रोल ऐक्ट का लाभ हुआ है। वहां जिला स्तर पर गठित कमेटी तय करती है कि तेजाब की खरीद-बिक्री कौन कर सकता है। वहां तेजाब हमले के आरोपी के लिए मौत की सजा का भी प्रावधान है।
अपने यहां की बात करें, तो सिक्किम में परमिट व्यवस्था लागू कर तेजाब की खुली बिक्री बंद कर दी गई है। ऐसे में, तेजाब की खरीद-बिक्री पर कड़ी नजर रखी जाए और अपराधियों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान हो, तो तस्वीर बदल सकती है।