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‘धीमा जहर’ ले लेगा आपकी जान
narnaul
Updated Wed, 18 Jun 2014 01:30 AM IST
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जिले के लोग जो पानी हैंडपंप, बोरवेल और गहरे पारंपरिक कुएं-बावड़ियों से पी रहे हैं वह भले ही दिखने में साफ लगे लेकिन इसमें न दिखने वाले विषैले रसायन फ्लोराइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। पिछले एक दशक से लोग इस धीमे जहर को पीने के लिए मजबूर हैं।
इसी का परिणाम है कि जिले में लोगों को दांतों, हड्डियों और जोड़ों की विभिन्न असाध्य बीमारियाें से जूझना पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी विभाग ने लोगों के स्वास्थ्य की कोई परवाह नहीं कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी का लगातार सेवन लोगों के लिए धीमा जहर जैसा साबित हो रहा है। पानी में फ्लोराइड की मात्रा प्रति लीटर 0.75 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। जिले के गांवों और नारनौल शहर के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा का प्रतिशत चौंकाने वाला है।
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जनस्वास्थ्य विभाग स्वयं भी पानी में फ्लोराइड की मात्रा की समय-समय पर जांच कराता है। इसके बाद भी विभाग ने लोगों के लिए पीने के साफ पानी की व्यवस्था का प्रबंध नहीं किया है।
चिंताजनक है फ्लोराइड का यह स्तर
कई हिस्सों के भूजल में फ्लोराइड पाया जाता है। फ्लोराइड युक्त जल लगातार पीने से फ्लोरोसिस बीमारी हो जाती है। इससे हड्डियां टेढ़ी, खोखली और कमजोर होने लगती हैं। रीढ़ की हड्डी में भी यह धीरे-धीरे जमा होने लगता है। इससे हमारी सामान्य दैनिक क्रियाएं भी प्रभावित होने लगती है।
फ्लोराइड शरीर में प्रवेश होने पर रक्त परिवहन तंत्र द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों में पहुंच कर धीरे-धीरे इनमें जमने लगता है। यह मां और गर्भस्थ शिशु के बीच स्थित दीवार को भी आसानी से भेद सकता है। यह उन अंगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जिनमें कैल्शियम तत्व की बहुलता हो।
यह अति संवेदनशील एवं सक्रिय अंग मस्तिष्क की तंत्रिकाओं (न्यूरोंस) को तोड़ने एवं नष्ट करने की क्षमता रखता है।
कैसे बचें
पीने के पानी के स्रोतों (हैंडपंप, बोरवेल, कुएं-बावड़ी) के जल में जनस्वास्थ्य विभाग अथवा जल रसायन परीक्षण प्रयोगशाला से फ्लोराइड की उपस्थिति और इसकी मात्रा की जांच करवाएं। फ्लोराइड होने पर इन स्रोतों पर डिफ्लोराइडेशन प्लांट लगवाने के लिए प्रयास करें। इसकी लागत कम है और अधिक जानकारी जनस्वास्थ्य विभाग से ली जा सकती है। भोजन में पत्तेदार हरी सब्जियां, दूध-दही, नीबू, आंवला, हरी फलियां इत्यादि का समावेश करें।
खतरनाक स्तर पर पहुंची मात्रा
जनस्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार गांव भुंगारका में भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा 0.75 की तुलना में 5.64 मिलीग्राम प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच चुकी है।
जिले के अन्य गांवाें में भी पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा 0.75 प्रतिशत से काफी अधिक पाई गई है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। फ्लोराइड के अलावा पेयजल में पाई जाने वाली टोटल डिसाल्वड सोलवेंट टीडीएस की मात्रा भी मानव स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
जिले में भूमिगत जल में फ्लोराइड का स्तर
गांव फ्लोराइड का स्तर
भुंगारका 5.64 मिलीग्राम प्रति लीटर
भोजावास 4.58 मिलीग्राम प्रति लीटर
रघुनाथपुरा 4.5 मिलीग्राम प्रति लीटर
मकसूसपुर 4.5 मिलीग्राम प्रति लीटर
कारोता 4.24 मिलीग्राम प्रति लीटर
दोखेरा 4.05 मिलीग्राम प्रति लीटर
आकोदा 3.91 मिलीग्राम प्रति लीटर
कालबा 3.78 मिलीग्राम प्रति लीटर
रामपुरा 3.74 मिलीग्राम प्रति लीटर
बापड़ोली 3.72 मिलीग्राम प्रति लीटर
हाजीपुर 3.60 मिलीग्राम प्रति लीटर
नांगल शालू 3.1 मिलीग्राम प्रति लीटर
खोडमा 2.79 मिलीग्राम प्रति लीटर
नीरपुर 2.47 मिलीग्राम प्रति लीटर
दोचाना 2.44 मिलीग्राम प्रति लीटर
नांगल काठा 2.33 मिलीग्राम प्रति लीटर
डोहर 2.18 मिलीग्राम प्रति लीटर
बदोपुर 2.17 मिलीग्राम प्रति लीटर
कोजिंदा 2.8 मिलीग्राम प्रति लीटर
बडकोदा 2.8 मिलीग्राम प्रति लीटर
तलोट 2.30 मिलीग्राम प्रति लीटर
सागरपुर 2.20 मिलीग्राम प्रति लीटर
जाखनी 2.20 मिलीग्राम प्रति लीटर
नांगल चौधरी 2.06 मिलीग्राम प्रति लीटर
इसी का परिणाम है कि जिले में लोगों को दांतों, हड्डियों और जोड़ों की विभिन्न असाध्य बीमारियाें से जूझना पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद भी विभाग ने लोगों के स्वास्थ्य की कोई परवाह नहीं कर रहा है।
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विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोराइड युक्त पानी का लगातार सेवन लोगों के लिए धीमा जहर जैसा साबित हो रहा है। पानी में फ्लोराइड की मात्रा प्रति लीटर 0.75 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। जिले के गांवों और नारनौल शहर के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा का प्रतिशत चौंकाने वाला है।
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जनस्वास्थ्य विभाग स्वयं भी पानी में फ्लोराइड की मात्रा की समय-समय पर जांच कराता है। इसके बाद भी विभाग ने लोगों के लिए पीने के साफ पानी की व्यवस्था का प्रबंध नहीं किया है।
चिंताजनक है फ्लोराइड का यह स्तर
कई हिस्सों के भूजल में फ्लोराइड पाया जाता है। फ्लोराइड युक्त जल लगातार पीने से फ्लोरोसिस बीमारी हो जाती है। इससे हड्डियां टेढ़ी, खोखली और कमजोर होने लगती हैं। रीढ़ की हड्डी में भी यह धीरे-धीरे जमा होने लगता है। इससे हमारी सामान्य दैनिक क्रियाएं भी प्रभावित होने लगती है।
फ्लोराइड शरीर में प्रवेश होने पर रक्त परिवहन तंत्र द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों में पहुंच कर धीरे-धीरे इनमें जमने लगता है। यह मां और गर्भस्थ शिशु के बीच स्थित दीवार को भी आसानी से भेद सकता है। यह उन अंगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जिनमें कैल्शियम तत्व की बहुलता हो।
यह अति संवेदनशील एवं सक्रिय अंग मस्तिष्क की तंत्रिकाओं (न्यूरोंस) को तोड़ने एवं नष्ट करने की क्षमता रखता है।
कैसे बचें
पीने के पानी के स्रोतों (हैंडपंप, बोरवेल, कुएं-बावड़ी) के जल में जनस्वास्थ्य विभाग अथवा जल रसायन परीक्षण प्रयोगशाला से फ्लोराइड की उपस्थिति और इसकी मात्रा की जांच करवाएं। फ्लोराइड होने पर इन स्रोतों पर डिफ्लोराइडेशन प्लांट लगवाने के लिए प्रयास करें। इसकी लागत कम है और अधिक जानकारी जनस्वास्थ्य विभाग से ली जा सकती है। भोजन में पत्तेदार हरी सब्जियां, दूध-दही, नीबू, आंवला, हरी फलियां इत्यादि का समावेश करें।
खतरनाक स्तर पर पहुंची मात्रा
जनस्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार गांव भुंगारका में भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा 0.75 की तुलना में 5.64 मिलीग्राम प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच चुकी है।
जिले के अन्य गांवाें में भी पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा 0.75 प्रतिशत से काफी अधिक पाई गई है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। फ्लोराइड के अलावा पेयजल में पाई जाने वाली टोटल डिसाल्वड सोलवेंट टीडीएस की मात्रा भी मानव स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
जिले में भूमिगत जल में फ्लोराइड का स्तर
गांव फ्लोराइड का स्तर
भुंगारका 5.64 मिलीग्राम प्रति लीटर
भोजावास 4.58 मिलीग्राम प्रति लीटर
रघुनाथपुरा 4.5 मिलीग्राम प्रति लीटर
मकसूसपुर 4.5 मिलीग्राम प्रति लीटर
कारोता 4.24 मिलीग्राम प्रति लीटर
दोखेरा 4.05 मिलीग्राम प्रति लीटर
आकोदा 3.91 मिलीग्राम प्रति लीटर
कालबा 3.78 मिलीग्राम प्रति लीटर
रामपुरा 3.74 मिलीग्राम प्रति लीटर
बापड़ोली 3.72 मिलीग्राम प्रति लीटर
हाजीपुर 3.60 मिलीग्राम प्रति लीटर
नांगल शालू 3.1 मिलीग्राम प्रति लीटर
खोडमा 2.79 मिलीग्राम प्रति लीटर
नीरपुर 2.47 मिलीग्राम प्रति लीटर
दोचाना 2.44 मिलीग्राम प्रति लीटर
नांगल काठा 2.33 मिलीग्राम प्रति लीटर
डोहर 2.18 मिलीग्राम प्रति लीटर
बदोपुर 2.17 मिलीग्राम प्रति लीटर
कोजिंदा 2.8 मिलीग्राम प्रति लीटर
बडकोदा 2.8 मिलीग्राम प्रति लीटर
तलोट 2.30 मिलीग्राम प्रति लीटर
सागरपुर 2.20 मिलीग्राम प्रति लीटर
जाखनी 2.20 मिलीग्राम प्रति लीटर
नांगल चौधरी 2.06 मिलीग्राम प्रति लीटर