{"_id":"4618aeb4-5109-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"sick-minded-people","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमार मानसिकता के लोग","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
बीमार मानसिकता के लोग
Updated Fri, 28 Dec 2012 09:41 PM IST
विज्ञापन
ऐसे समय जब देश में बलात्कार और यौन उत्पीड़न को रोकने के उपायों को लेकर तीखी बहस चल रही है, तब राजनीतिक वर्ग से लगातार महिलाओं के बारे में अपमानजक टिप्पणियां सुनने को मिल रही हैं। यह विडंबना ही है कि दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार युवती सिंगापुर के अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है, और यहां हमारे नेता महिलाओं के बारे में ऐसी-ऐसी बातें कह रहे हैं, जिन्हें किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
ऐसी बातें या तो मध्ययुगीन आख्यानों में मिलती हैं या फिर तालिबान के प्रभाव वाले क्षेत्रों में सुनी जाती हैं। पहले तो राष्ट्रपति के सांसद पुत्र अभिजीत मुखर्जी ने दिल्ली की प्रदर्शनकारी छात्राओं और महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर विवाद को जन्म दिया। उसके बाद पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ माकपा नेता अनीसुर रहमान ने बलात्कार पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर टिप्पणी करते हुए सारी हदें ही पार कर दीं।
विज्ञापन
बाद मे उन्होंने माफी जरूर मांग ली, लेकिन वह दबाव का ही नतीजा थी। ममता बनर्जी के बारे में उन्होंने जो कुछ कहा, उसे यहां शब्दशः लिखा भी नहीं जा सकता! जब एक मुख्यमंत्री के बारे में ऐसी बीमार सोच रखी जा सकती है, तो साधारण महिलाओं के बारे में सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है। कुछ ऐसी ही ओछी बातें कुछ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की नेता रीता बहुगुणा ने बलात्कार का मामला उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बारे में कही थीं, जिस पर भी काफी विवाद हुआ था। वास्तव में महिलाएं राजनीति सहित दूसरे क्षेत्रों में आगे जरूर बढ़ रही हैं, मगर उनकी चुनौतियों कम नहीं हो रही हैं।
विज्ञापन
इस देश में स्त्री की तुलना देवी से की जाती है, मगर उसकी अस्मिता और सुरक्षा आज सबसे बड़ा मसला है। इस स्थिति के लिए कहीं न कहीं हमारी राजनीतिक व्यवस्था भी जिम्मेदार है, जिसमें ऐसे लोग संसद और विधानसभा में पहुंचने में सफल हो जाते हैं, जिनके खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज हैं। इस मामले में कोई भी राजनीतिक दल अपवाद नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक पार्टियों ने आधा दर्जन से अधिक ऐसे लोगों को टिकट दिए थे, जिन पर बलात्कार के मामले दर्ज थे। जाहिर है, महिलाओं की सुरक्षा और अस्मिता का मसला राजनीतिक सुधार से भी जुड़ा है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।