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गंभीर मरीजों के इलाज में चिकित्सकों का व्यवहार संयमित जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
Updated Fri, 10 Oct 2014 03:02 AM IST
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समाज में स्वास्थ्य संबंधित जागरुकता लाने की जरूरत है।
इसमें अच्छी सेहत बरकरार रखने का पक्ष होना जरूरी है।
साथ ही गंभीर रोगों में रोगी का जीवन बचाने में मुश्किल होने पर उसके परिजनों को सही स्थिति की जानकारी देना जरूरी है।
ऐसे हालात में डॉक्टरों को संयम और समझदारी से काम लेने के साथ उनका रवैया सहानुभूति पूर्ण होना जरूरी है।
यह बात दिल्ली रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में बृहस्पतिवार को इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैलिएटिव केयर द्वारा आयोजित जागरूकता एवं परिसंवाद कार्यक्रम में उभर कर आए। विशेष रूप से टर्मिनल रोगों में ‘एंड ऑफ लाइफ केयर’ पर परिसंवाद कार्यक्रम में खुलकर चर्चा की गई।
पं.बीडी शर्मा हेल्थ विवि के क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रोफेसर डा. ध्रुव चौधरी ने इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से इस विषय की पृष्ठभूमि रखी। प्रो.चौधरी ने कहा कि बेहद गंभीर रोग से पीड़ित रोगी, जो कि आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं, उनसे चिकित्सकों को सहानुभूति से संवाद करना चाहिए। ऐसा ही उनके परिजनों से किए जाने की जरूरी है। परिसंवाद कार्यक्रम में चर्चा में डा. एसके श्रीवास्तव, प्रो. एसबी सिवाच, डा. एसएस सांगवान, डा. रणबीर सिंह दहिया, डा. रवि मोहन, अधिवक्ता बीआर अरोड़ा, तथा वरिष्ठ पत्रकार ओमकार चौधरी ने अपने विचार रखे। इसका संचालन डा. प्रशांत ने किया। इस दौरान सभी के संवाद में निकल कर आया कि चिकित्सक भरसक प्रयास कर सकते हैं, परंतु मृत्यु भी जीवन का एक सच है। डेथ विद डिगनटी की बात समेत इलाज के दौरान जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने पर विचार सांझे किए गए।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. एसएस सांगवान ने कहा कि चिकित्सकों को रोगियों को गुणवत्ता परक जीवन देने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार के परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने मौजूदा दौर में और भी ज्यादा जरूरी हैं। कार्यक्रम में पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. एसएन चुघ, प्रो. केवी गुप्ता तथा प्रो.हरप्रीत सिंह ने अध्यक्षता की। प्रति कुलपति प्रो. वीकेजैन, सिविल सर्जन डा.शिव कुमार, डा. एसके श्रीवास्तव, डा. एसबी सिवाच, डा. पीके मारवाह, डा. रवि मोहन समेत शहर के चिकित्सक, हेल्थ विवि के फैकल्टी सदस्य एवं चिकित्सक मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में यूथेनेसिया समेत एंड ऑफ लाइफ केयर के विभिन्न पहलुओं पर एडवोकेट बीआर अरोड़ा ने प्रकाश डाला।
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इसमें अच्छी सेहत बरकरार रखने का पक्ष होना जरूरी है।
साथ ही गंभीर रोगों में रोगी का जीवन बचाने में मुश्किल होने पर उसके परिजनों को सही स्थिति की जानकारी देना जरूरी है।
ऐसे हालात में डॉक्टरों को संयम और समझदारी से काम लेने के साथ उनका रवैया सहानुभूति पूर्ण होना जरूरी है।
यह बात दिल्ली रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में बृहस्पतिवार को इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैलिएटिव केयर द्वारा आयोजित जागरूकता एवं परिसंवाद कार्यक्रम में उभर कर आए। विशेष रूप से टर्मिनल रोगों में ‘एंड ऑफ लाइफ केयर’ पर परिसंवाद कार्यक्रम में खुलकर चर्चा की गई।
पं.बीडी शर्मा हेल्थ विवि के क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रोफेसर डा. ध्रुव चौधरी ने इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से इस विषय की पृष्ठभूमि रखी। प्रो.चौधरी ने कहा कि बेहद गंभीर रोग से पीड़ित रोगी, जो कि आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं, उनसे चिकित्सकों को सहानुभूति से संवाद करना चाहिए। ऐसा ही उनके परिजनों से किए जाने की जरूरी है। परिसंवाद कार्यक्रम में चर्चा में डा. एसके श्रीवास्तव, प्रो. एसबी सिवाच, डा. एसएस सांगवान, डा. रणबीर सिंह दहिया, डा. रवि मोहन, अधिवक्ता बीआर अरोड़ा, तथा वरिष्ठ पत्रकार ओमकार चौधरी ने अपने विचार रखे। इसका संचालन डा. प्रशांत ने किया। इस दौरान सभी के संवाद में निकल कर आया कि चिकित्सक भरसक प्रयास कर सकते हैं, परंतु मृत्यु भी जीवन का एक सच है। डेथ विद डिगनटी की बात समेत इलाज के दौरान जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने पर विचार सांझे किए गए।
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कार्यक्रम में कुलपति प्रो. एसएस सांगवान ने कहा कि चिकित्सकों को रोगियों को गुणवत्ता परक जीवन देने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार के परिसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने मौजूदा दौर में और भी ज्यादा जरूरी हैं। कार्यक्रम में पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. एसएन चुघ, प्रो. केवी गुप्ता तथा प्रो.हरप्रीत सिंह ने अध्यक्षता की। प्रति कुलपति प्रो. वीकेजैन, सिविल सर्जन डा.शिव कुमार, डा. एसके श्रीवास्तव, डा. एसबी सिवाच, डा. पीके मारवाह, डा. रवि मोहन समेत शहर के चिकित्सक, हेल्थ विवि के फैकल्टी सदस्य एवं चिकित्सक मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में यूथेनेसिया समेत एंड ऑफ लाइफ केयर के विभिन्न पहलुओं पर एडवोकेट बीआर अरोड़ा ने प्रकाश डाला।
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