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रोजगार के साथ सुरक्षा भी दें

Tue, 21 Oct 2014 10:49 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Oct 2014 10:49 AM IST
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Security alongwith Employment

तकरीबन चार वर्ष पूर्व दिल्ली के धौलाकुआं इलाके में एक कॉल सेंटर कर्मी से हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में निचली अदालत ने पांचों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बेशक इस मामले में आरोपियों तक पहुंचने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी, पर इसने हमारी व्यवस्था की खामियों की ओर भी इशारा किया है।

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इन पांचों युवाओं की आपराधिक पृष्ठभूमि थी और इनमें से कुछ पर तो पहले भी बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। उनके वकील ने तर्क दिया था कि चूंकि उनके परिवारों की आर्थिक निर्भरता इन्हीं पर है, इसलिए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। मगर इस मामले का दूसरा पहलू यह भी है कि उस युवती के साथ जो कुछ घटा, उसकी भरपाई नहीं हो सकेगी। बलात्कार किसी भी स्त्री के साथ किया जाने वाला सबसे जघन्य अपराध है।
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उस युवती का कुसूर सिर्फ यही था कि वह नौकरी की तलाश में अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर इस महानगर में आई थी और इस हादसे के बाद इस कदर टूट गई कि दोबारा काम करने के लिए इस शहर का रुख करने का साहस नहीं जुटा सकी! इस घटना ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे की ओर ध्यान खींचा था। मगर इस घटना के दो वर्ष बाद ही दक्षिण दिल्ली के इलाके में निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें उसकी मौत तक हो गई। ये घटनाएं बताती हैं कि यह क्षेत्र रात में महिलाओं के लिए कितना असुरक्षित है।
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वास्तव में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के मामले में दिल्ली का रिकॉर्ड बेहद खराब है। निर्भया मामले के बाद अस्तित्व में आए कड़े कानून के बावजूद बलात्कार के मामलों में कमी नहीं आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक पिछले वर्ष राजधानी दिल्ली में बलात्कार के सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए थे, वहीं महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले मुंबई और बंगलूरू जैसे शहरों का रिकॉर्ड भी अच्छा नहीं है। ये वे शहर हैं, जहां देश भर से महिलाएं रोजगार के सिलसिले में पहुंचती हैं और उन्हें रात में भी काम करना पड़ता है।


जाहिर है, विकास और निवेश जैसे जुमलों के जिस दौर में हम रह रहे हैं, उसमें महिलाएं भी बराबर की साझीदार हैं, मगर उनकी सुरक्षा आज भी सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसे सिर्फ पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

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