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एसडीएम को कहा, साहब बाहर जाइए

Fri, 05 Sep 2014 03:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक
अमर उजाला ब्यूरो/ रोहतक Updated Fri, 05 Sep 2014 03:04 AM IST
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एमडीयू में मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारियों ने कैंपस में हंगामा कर दिया।
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यूनिवर्सिटी गेट नंबर एक पर सांकेतिक जाम के बाद वीसी सचिवालय और खेल विभाग के बीच सड़क जाम कर दी। इससे नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप का उद्घाटन कार्यक्रम भी आधा घंटा रुका रहा।

एसडीएम को गुस्से भरे लहजे में कर्मचारियों ने कहा कि वे यूनिवर्सिटी से बाहर चले जाएं। वीसी भी हाथ बांधे आरोप सुनते रहे। स्थानीय मांगों पर कुलपति के आश्वासन के बाद जाम खोल दिया गया। लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से मांगें नही माने जाने के कारण कर्मियों की बेमियादी हड़ताल जारी है। चेतावनी दी है कि विवि में किसी भी सरकारी नुमाइंदे को नहीं घुसने दिया जाएगा।
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इससे पहले, बृहस्पतिवार सुबह दस बजे गैर शिक्षक कर्मचारी गेट नंबर एक पर पहुंचे और बैडमिंटन प्रतियोगिता के विधिवत उद्घाटन के लिए आने वाले विधायक बी. बी. बतरा का विरोध करने के लिए जाम लगाने की कोशिश की।
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पांच मिनट तक गेट जाम रखा गया। लेकिन बारिश के कारण इसे सांकेतिक जाम का नाम दे कर्मी वीसी सचिवालय की ओर बढ़ गए। रैली के रूप में उमड़ा कर्मचारियों के हुजूम ने खेल विभाग का रास्ता जाम कर दिया।

यहां विधायक को कार्यक्रम में शामिल नहीं होने देने के लिए यह जाम लगाया गया, लेकिन विधायक बतरा पहुंचे ही नहीं। आधे घंटे तक कर्मियों ने किसी को आने-जाने नहीं दिया। इससे प्रतियोगिता भी देरी से शुरू हो सकी।
एसडीएम भी गुस्साए और बहस
कर्मचारियों को समझाने एसडीएम दलबीर सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और कहा कि सरकार के किसी भी प्रतिनिधि से न तो बात होगी और न यूनिवर्सिटी में आने देंगे। गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रधान दयानंद छिकारा और महासचिव अनिल मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने उनसे धोखा किया है। आप यहां से जाएं, आपसे कोई बात नहीं होगी। इससे एसडीएम भी गुस्सा गए और तीखी बहस हुई। कर्मी नहीं माने तो एसडीएम ने कहा ठीक है आप जो कर सकते हो करो। लेकिन हमें भी अपना काम करना आता है। इस पर एसडीएम और पुलिस अधिकारी आला अधिकारियों से चर्चा करने एक तरफ आ गए। तब तक पुलिसकर्मियों की बस भरकर विवि में पहुंच गई।
कुलपति को भी नहीं बख्शा, सिर झुकाए सुनते रहे
नाराज कर्मचारियों ने वीसी एच. एस. चहल को भी नहीं बख्शा। वीसी बात करने पहुंचे तो जमकर नारेबाजी की गई। रजिस्ट्रार और कुलपति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। प्रधान ने कहा कि कुलपति ने स्थानीय स्तर पर मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया है। इसका कारण रजिस्ट्रार एस. पी. वत्स हैं। वे कर्मचारी विरोधी काम कर रहे हैं। आरोप लगाया कि 13 कर्मचारियोें को नियमित करने की मांग पर सहमति बनी थी, लेकिन रजिस्ट्रार ने मामले को अटका दिया। वीसी सभी आरोप चुपचाप सिर झुकाए सुनते रहे।
दो मिनट में मुकर गए वीसी
वीसी ने घेराव में प्रधान छिकारा को आश्वासन दिया कि वे कल ही स्थानीय स्तर की मांगों को पूरा कर देंगे। कर्मचारियों की नाराजगी कम हुई। जब सभी के सामने छिकारा ने वीसी की दोबारा रजामंदी के लिए पूछा तो कुलपति तत्काल मुकर गए। कहा, शुक्रवार को बैठक में देखेंगे क्या हो सकता है। कर्मचारी फिर भड़क गए। वीसी ने फिर कहा कि बैठक में मामला तय करेंगे। प्रदेश सरकार स्तर की मांगों की सिफारिश और यूनिवर्सिटी में हड़ताल होने से चरमराई व्यवस्था की जानकारी देने केलिए वीसी ने रजिस्ट्रार को चंडीगढ़ भेजे जाने की भी जानकारी दी।
आपस में ही उलझे कर्मचारी
आश्वासन पर जाम खोलने पर राजी संघ पदाधिकारियों को कर्मचारियों का विरोध झेलना पड़ा। एक ने कहा कि फेडरेशन की जो आठ सूत्रीय मांगों के लिए बुलाया गया है, उन पर बात करो, स्थानीय मांगें बाद का मैटर है। एक कर्मचारी ने कहा जब तक मांगें पूरी नहीं होती किसी की नहीं सुनी जाएगी। हालांकि कर्मी समझाने के बाद मान गए।
हड़ताल जारी, आज घेरेंगे विधायक आवास
महासचिव अनिल मल्होत्रा ने बताया कि मांगें पूरी नहीं होने तक यूनिवर्सिटी में किसी भी एमएलए, एमपी, नेता या राज्य सरकार के आईएएस अधिकारी को नहीं घुसने देंगे। किसी सरकारी आयोजन नहीं होने देंगे। बैडमिंटन चैंपियनशिप पहले से तय कार्यक्रम है, इसलिए इसका विरोध नही होगा, लेकिन इसमें भी किसी नेता या अधिकारी को नहीं आने दिया जाएगा। मल्होत्रा ने बताया कि  हड़ताल जारी रहेगी और शुक्रवार को विधायक बतरा के आवास पर विरोध किया जाएगा।

चरमराई  व्यवस्था
हड़ताल से यूनिवर्सिटी में व्यवस्था चरमरा गई है। रिक्त सीटों पर प्रवेश मामले अटक गए हैं। कई परीक्षाओं के परिणाम भी घोषित किए जाने थे, जो नहीं हो पाए। विद्यार्थियों की पुरानी मार्कशीट जारी करने का काम और डीएमसी जैसे दस्तावेजों का वितरण भी ठप हो गया है। काम के लिए यहां पहुंचे छात्रों को मायूस होकर बैरंग लौटना पड़ा।
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