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शिखर पर सानिया
नई दिल्ली
Updated Mon, 13 Apr 2015 08:29 PM IST
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सानिया मिर्जा का डबल्स टेनिस में दुनिया की शीर्ष खिलाड़ी बनने तक का सफर जितना रोमांचक है, उतना ही प्रेरक भी। वह उन विरल खिलाड़ियों में से हैं, जो अपनी क्षमता और कमजोरियों को बखूबी पहचानते हैं और उसके अनुरूप अपनी रणनीति बनाते हैं।
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कुछ वर्ष पूर्व तक वह फिटनेस को लेकर खासी परेशान थीं और 2012 में कलाई में चोट की वजह से एकबारगी तो यह भी लगने लगा था कि उनका टेनिस का सफर खत्म हो सकता है। इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान डबल्स मुकाबलों पर केंद्रित कर लिया था, चार्ल्सटन में रविवार को स्विस स्टार मार्टिना हिंगिस के साथ डब्ल्यूटीए फैमिली सर्किल कप का फाइनल जीतने के बाद साबित कर दिया कि उनका यह कदम कितना सही था।
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हालांकि सानिया 2007 में एकल मुकाबलों में 27वीं रैंकिंग तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन इसके बाद एकल मुकाबलों में उनकी स्थिति क्रमशः कमजोर होती गई। डबल्स में खुद सानिया तो शिखर पर हैं ही, मार्टिना के साथ उनकी जोड़ी भी दुनिया की नंबर वन जोड़ी है। यह गौर करने वाली बात है कि हाल ही में भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस ने भी मार्टिना हिंगिस के साथ जोड़ी बनाई है और इन दोनों ने ऑस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब जीता है। सानिया और मार्टिना की जोड़ी को बने अधिक दिन नहीं हुए हैं, लेकिन दोनों ने अब तक जो 14 मैच खेले हैं, उनमें सिर्फ तीन सेटों में ही उनकी पराजय हुई है।
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मगर व्यक्तिगत तौर पर देखें, तो सानिया मिर्जा की यह उपलब्धि खासी मायने रखती है क्योंकि उन्होंने जब टेनिस खेलना शुरू किया था, तब तक तो मार्टिना हिंगिस स्टार बन चुकी थीं! और जैसा कि खुद सानिया ने कहा है कि लोग उन्हें नई मार्टिना तक कहने लगे थे। बेशक, उनसे पहले लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी पुरुषों के डबल्स के शिखर तक पहुंच चुकी है, मगर टेनिस का यह शिखर छूने वाली सानिया पहली भारतीय महिला हैं।
थोड़े दिनों पहले भारतीय बैडमिंटन सितारा साइना नेहवाल ने भी दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी बनकर अपनी धमक दिखाई थी। वास्तव में सानिया और साइना की उपलब्धियों पर हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा होगा। उनकी कामयाबी उन लड़कियों के लिए प्रेरणादायक है, जो इन खेलों में अपना करियर तलाश रही हैं।