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बहादुर बहनों को सलाम

अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 01 Dec 2014 08:31 PM IST
Salute the brave sisters
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हरियाणा में कॉलेज जाने वाली दो बहनों ने एक चलती सरकारी बस में उनसे छेड़छाड़ करने वाले तीन युवकों से मुकाबला कर साहस का परिचय दिया है। यह हैरानी की बात नहीं है कि जिस वक्त कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही आरती और पूजा इन युवकों से जूझ रही थीं, उनकी मदद के लिए बस में सवार एक भी यात्री सामने नहीं आया! वास्तव में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं जितनी आम हैं, उतनी ही आम ऐसी घटनाओं पर लोगों की उदासीनता है। यदि उसी बस में सवार एक अन्य महिला ने इस घटना की वीडियो क्लीपिंग न बनाई होती, तो शायद यह मामला इस रूप में सामने भी नहीं आ पाता।
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दिसंबर, 2012 में दिल्ली में चलती बस में निर्भया के साथ हुई बर्बर घटना ने पूरे देश को उद्वेलित कर दिया था और उसके बाद एक कड़ा कानून तक अस्तित्व में आ गया। कुछ राज्यों ने महिला सुरक्षा को लेकर हेल्पलाइन जैसी पहल भी की, पर इस मामले में ही देखें, तो दोनों बहनों ने हेल्पलाइन पर संपर्क करने की कोशिश की थी, पर नाकाम रहीं।

महिलाओं की सुरक्षा सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ी हुई है। हम आर्थिक परिवर्तन की बात तो करते हैं, लेकिन उसके अनुरूप सामाजिक बदलाव को तैयार नहीं हैं। लड़कियां न केवल आज घरों से निकल कर उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं, बल्कि पुरुषों के बरक्स तकरीबन हर क्षेत्र में अपना डंका भी पीट रही हैं। लेकिन पुरुषवादी मानसिकता उनकी इस उपलब्धि को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाती। खाप पंचायतों को ही देखें, तो वे लड़कियों के पहनावे और मोबाइल फोन न रखने तक को लेकर फरमान जारी करती हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर उनकी ओर से पहल दिखाई नहीं देती।

इन दोनों बहनों ने जिस तरह का साहस दिखाया वह अपवाद है, क्योंकि अमूमन लड़कियां छेड़छाड़ का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पातीं। शायद इसलिए, क्योंकि उन्हें रोज उन्हीं रास्तों और उन्हीं लोगों के बीच से होकर गुजरना होता है। आखिर हरियाणा में ही इसी वर्ष अगस्त में स्कूल में पढ़ने वाली दो होनहार लड़कियों से होने वाली छेड़छाड़ के बारे में तब पता चला था, जब उन दोनों ने तंग आकर खुदकुशी कर ली।

हरियाणा सरकार ने इन दोनों बहनों को सम्मानित करने और इस मामले की त्वरित अदालत में सुनवाई की घोषणा की है, लेकिन इसके साथ ही एहतियातन उनके परिवार की सुरक्षा पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

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