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रूस अपनी जिम्मेदारी समझे
नई दिल्ली
Updated Fri, 18 Jul 2014 08:22 PM IST
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एक साल में दूसरी बार मलयेशियाई विमान के साथ हुई त्रासदी दुर्योग भरी तो है ही, उससे भी दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि मिसाइल हमले का निशाना बने निर्दोष यात्रियों का रूस और यूक्रेन के बीच जारी लड़ाई से कोई लेना-देना नहीं था। मारे गए लोगों में दुनिया भर के कुछ प्रतिष्ठित एड्स शोधकर्ता तो थे ही, चालक दल में भारतीय मूल के दो लोगों के होने की भी जानकारी मिली है। इस कायराना हरकत की सिर्फ निंदा करना काफी नहीं है, बल्कि न्याय का तकाजा यही है कि जितनी जल्दी हो सके, दोषियों की शिनाख्त की जाए।
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पूर्वी यूक्रेन की जिस जगह यह घटना हुई है, वह इलाका पिछले कई महीनों से युद्धक्षेत्र बना हुआ है। जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह ठीक-ठीक बता पाना मुश्किल है कि इस विमान को रूसी विद्रोहियों ने मार गिराया या इसमें यूक्रेन का हाथ है। पर दोनों मुल्कों ने अगर पहले ही संयम का परिचय दिया होता, तो यह नौबत नहीं आती। विश्व जनमत की लगातार अनदेखी कर पूरे क्षेत्र को अखाड़ा बनाते हुए नहीं सोचा गया कि यह यूरोप से दक्षिण पूर्व एशिया आने वाले विमानों का आम रूट है।
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बगैर सुबूत के अमेरिका और यूरोप इस हादसे के लिए सीधे-सीधे रूस को जिस तरह जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वह जल्दबाजी का नमूना हो सकता है, पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन इलाके को अशांति की आग में झोंकने के जिम्मेदार तो हैं ही। विगत मार्च में क्रीमिया को ताकत के बूते रूस में मिलाकर हिंसा की शुरुआत उन्होंने ही की थी। रूस समर्थक विद्रोही यूक्रेन के कुछ इलाकों में अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं, तो यह मॉस्को की शह के बगैर संभव ही नहीं है। पुतिन के आक्रामक रवैये के कारण दो दिन पहले ही अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर ताजा प्रतिबंध आयद किए थे।
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चूंकि इस विमान हादसे में मारे गए ज्यादातर लोग यूरोप के हैं, ऐसे में, यूरोप में क्षोभ और गुस्से की वजह समझ में आती है। रूस के लिए अब भी मौका है कि दुख की इस घड़ी में वह थोड़ी परिपक्वता दिखाए और हिंसा का रास्ता छोड़ने का संकल्प ले। स्वागतयोग्य है कि पुतिन ने संघर्ष विराम की बात की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस समस्या का शांतिपूर्ण हल तलाशने में जुटना चाहिए।