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सरहद को जोड़ती सड़क
नई दिल्ली
Updated Wed, 17 Jun 2015 08:15 PM IST
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भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के बीच हुआ मोटर वाहन समझौता इन चार देशों के लिए ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के लिहाज से भी मील का पत्थर है। इससे इन चारों देशों के बीच सड़क मार्ग से यात्रियों और सामान की निर्बाध आवाजाही हो सकेगी। यह समझौता दक्षेस के सदस्य देशों के बीच न सिर्फ मेलजोल बढ़ाएगा, बल्कि इससे व्यापारिक रिश्तों को भी मजबूती मिलेगी।
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वास्तव में इस समझौते की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी और दक्षेस के सभी सदस्य देशों के बीच ऐसे समझौते के लिए 2009 से प्रयास किए जा रहे हैं। भारत ने पिछले वर्ष सितंबर में ही दक्षेस मोटर वाहन समझौते की पुष्टि भी कर दी थी, लेकिन पाकिस्तान की वजह से काठमांडू में हुए पिछले दक्षेस सम्मेलन में इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। हालांकि दक्षेस के इन चार पड़ोसियों के बीच हुआ यह समझौता न केवल अन्य देशों को राह दिखा सकता है, बल्कि इससे इन देशों को और निकट आने का अवसर मिलेगा। नेपाल और बांग्लादेश के साथ वैसे भी भारत ने अलग से द्विपक्षीय समझौते कर रखे हैं। इस समझौते से भारत ही नहीं, बल्कि बाकी तीन देशों को भी फायदा होगा। मसलन, भारत होकर बांग्लादेश से नेपाल और भूटान की दूरी सौ किलोमीटर भी नहीं है, लेकिन इस समझौते के बिना सड़क के रास्ते से वहां पहुंचना मुश्किल था। इसके अस्तित्व में आने के बाद एक बड़ा आर्थिक गलियारा बन जाएगा, जिससे इनके बीच आपसी व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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चार देशों के परिवहन मंत्रियों की मौजूदगी में हुए इस समझौते में उम्मीद जताई गई है कि इससे अंतर क्षेत्रीय व्यापार 60 फीसदी तक बढ़ सकता है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को भी रेखांकित करता है, जिसके अस्तित्व में आने के बाद भारत सहित इन देशों के लिए आसियान का फलक भी खुल जाएगा। वैसे भी भारत म्यांमार और थाईलैंड के साथ इसी तरह के समझौते की तैयारी कर रहा है। यदि दक्षेस के बाकी सदस्य देशों के बीच भी ऐसे समझौते अस्तित्व में आ जाएं, तो दक्षिण एशिया में भी यूरोपीय देशों की तरह सड़क से आवाजाही संभव हो सकेगी। सरहद को जोड़ती सड़क से सिर्फ सरकारें ही नहीं जुड़ेंगी, वहां के नागरिक भी एक दूसरे के करीब आएंगे।
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