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राजन का तोहफा
संपादकीय
Updated Thu, 05 Mar 2015 08:58 PM IST
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रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने अप्रत्याशित तरीके से मुख्य बैंक दर रेपो रेट में 25 आधार अंक की कमी कर इसे 7.5 फीसदी करने की घोषणा की है। होली से ऐन पहले उठाए गए इस कदम का असर भी शेयर बाजार पर दिखा है, जहां सेंसेक्स 30,000 के ऐतिहासिक मील के पत्थर को छू गया था।
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हालांकि बुधवार को कुछ गिरावट के साथ यह 29,380 पर बंद हो गया,लेकिन बजट के बाद से सुस्त पड़े बाजार में रिजर्व बैंक के इस फैसले से तेजी आई है और साफ संकेत हैं कि आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। राजन के मुताबिक मुद्रास्फीति की दर नियंत्रित है, जिससे रेपो रेट में कटौती करने का अनुकूल माहौल बना। हालांकि इसकी एक बड़ी वजह केंद्रीय बजट को भी माना जा सकता है, जिसमें आर्थिक और वित्तीय मजबूती पर खासा जोर दिया गया है। जो लोग रिजर्व बैंक और सरकार के बीच दूरी देख रहे थे, राजन के इस कदम से उन्हें अपनी राय बदलनी पड़ी है।
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एनडीए सरकार और रिजर्व बैंक के बीच जैसा तालमेल अभी दिख रहा है, वैसा यूपीए सरकार के खासतौर से अंतिम वर्षों में नजर नहीं आ रहा था। बेशक, वैश्विक परिस्थितियां भी सरकार के अनुकूल हैं, खासतौर से कच्चे तेल के दाम नियंत्रित हैं, जिससे वित्तीय घाटे को कम करने में मदद मिल रही है। इससे रिजर्व बैंक भी जोखिम लेने से नहीं हिचक रहा है। मगर असली सवाल आम उपभोक्ताओं का है, जिसे अभी तक किसी तरह की राहत नहीं मिली है।
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असल में राजन ने जनवरी में द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा से ऐन पहले पहली बार इस वर्ष रेपो रेट में 25 आधार अंक की कमी थी और तभी माना जा रहा था कि इससे आवास और वाहन ऋण लेने वाले आम उपभोक्ताओं का बोझ कुछ कम होगा। हालांकि अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं। रेपो रेट में लगातार दो बार कटौती करने से निश्चय ही बैंकों को राहत मिली होगी, जिनकी गैरनिष्पादित पूंजी (एनपीए) लगातार बढ़ती जा रही है।
जानकार कहते हैं कि रेपो रेट में हुई कटौतियों से बैंक ग्राहकों को थोड़ी राहत तो दे सकते हैं, लेकिन बड़ी राहत के लिए जरूरी है कि रेपो रेट सात फीसदी के आसपास हो। यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि राजन अपने अगले कदम से कब सबको अचंभित करते हैं।