{"_id":"4b8ae9ddd8f00c3f98ce8e14b6964c9d","slug":"reforms-in-coal-sector-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोयला क्षेत्र में सुधार","category":{"title":"Other Archives","title_hn":"अन्य आर्काइव","slug":"other-archives"}}
कोयला क्षेत्र में सुधार
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Oct 2014 02:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार द्वारा कोयला खदानों की ई-नीलामी के लिए अध्यादेश लाए जाने के कदम से सर्वोच्च अदालत के 214 कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द किए जाने के फैसले से जारी असमंजस को दूर करने में मदद मिलेगी। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द करते हुए संबंधित कंपनियों को छह महीने तक काम करने की छूट दी थी, लेकिन इस फैसले से आशंकाएं जताई जा रही थीं कि देश में कोयले का संकट उत्पन्न हो सकता है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित होगा।
विज्ञापन
वहीं दूसरी ओर यह आशंका भी जताई जा रही थी कि सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के दबाव में सरकारी कोयला कंपनी का नियंत्रण कम कर सकती है और अंततः कोयला क्षेत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करना चाहती है। मगर सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभी वह कोयला क्षेत्र से कोल इंडिया का नियंत्रण नहीं हटा रही है, वहीं सिर्फ ऐसी निजी कंपनियां ही ई-नीलामी में हिस्सा ले सकेंगी, जिन्हें लोहा, सीमेंट या बिजली संयंत्र के लिए कोयले की जरूरत है। साथ ही एनटीपीसी और राज्य बिजली बोर्डों को भी कोयला खदानें आवंटित की जाएंगी।
विज्ञापन
इस तरह देखा जाए, तो तात्कालिक रूप से कोयला संकट को दूर करने की कोशिश की गई है। फिर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इस प्रक्रिया में तीन से चार महीने लगेंगे और उसके बाद ही कोयला उत्पादन शुरू हो सकेगा। तो क्या इसका मतलब यह भी है कि बिजली संकट को जितना बड़ा बताया जा रहा था, वह वास्तव में वैसा नहीं है! इसके बावजूद नए निवेश के लिए कोयला क्षेत्र में व्यापक सुधार की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि सरकार पारदर्शी नीति बनाए और सरकारी उपक्रमों के साथ ही निजी क्षेत्र के बीच में संतुलन कायम करे।
विज्ञापन
असल में प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी जरूरत है, फिर चाहे वह सरकारी कंपनियां हों या निजी। नए सिरे से कोयला खदानों के आवंटन से औद्योगिक उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है, मगर इसके साथ ही एक आशंका यह भी पैदा हो गई है कि कहीं कोयला खनन की बढ़ी हुई कीमत का असर इस्पात, सीमेंट और बिजली के आम उपभोक्ताओं पर तो नहीं पड़ेगा! जाहिर है, कोयला क्षेत्र में सुधार करते समय आम उपभोक्ताओं तथा खदानों और संयंत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।