फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   reason of devaluation of yuan

युआन के अवमूल्यन की वजह

Wed, 12 Aug 2015 08:34 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Aug 2015 08:34 PM IST
विज्ञापन
reason of devaluation of yuan

जो चीन पिछले करीब ढाई दशकों से अपनी मुद्रा पर किसी किस्म का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करता था, उसने संकट के समय युआन का अवमूल्यन कर अपने लचीलेपन का ही परिचय दिया है। इससे निर्यात केंद्रित उसकी अर्थव्यवस्था तत्काल गति भले न पकड़े, पर भारत सहित पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ना शुरू हो चुका है। चीन के जो उत्पाद पहले कम लागत के कारण दुनिया भर में सस्ते बिकते थे, अब वे मुद्रा के अवमूल्यन के कारण सस्ते में बिकेंगे।

विज्ञापन


ध्वस्त शेयर बाजार, घटते निर्यात और आर्थिक विकास दर कम होने की आशंकाओं के बीच बीजिंग से ऐसा ही कोई कदम उठाने की अपेक्षा थी। अलबत्ता यह मानना कठिन है कि मुद्रा अवमूल्यन के पीछे बीजिंग का एकमात्र उद्देश्य अर्थव्यवस्था को गति देना ही है। चीन ने युआन का दो प्रतिशत से भी कम अवमूल्यन किया है। जबकि पिछले साल यूरो का 18 फीसदी अवमूल्यन हुआ था। वहीं जापानी येन का अवमूल्यन करीब 22 प्रतिशत था।
विज्ञापन


जाहिर है कि मामूली अवमू्ल्यन से बीजिंग बहुत लाभ हासिल नहीं कर सकता। चीन के केंद्रीय बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने भी इस फैसले को अवमूल्यन नहीं, तकनीकी सुधार बताया है। इसलिए बीजिंग के इस फैसले के पीछे युआन को वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी जगह दिलाना भी हो, तो आश्चर्य नहीं। वह पिछले काफी समय से अपनी मुद्रा को आईएमएफ की रिजर्व करेंसी (डॉलर, यूरो, येन और ब्रिटिश पौंड के साथ) में शामिल कराना चाहता है। रिजर्व करेंसी वह करेंसी होती है, जिसमें सदस्य देश आपस में या आईएमएफ को भुगतान कर सकते हैं। युआन यह लक्ष्य हासिल कर ले, तो दुनिया भर में चीन की आर्थिक छवि और मजबूत हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर युआन के साथ मुश्किल यह है कि वह लचीली मुद्रा नहीं है और उसके इस्तेमाल में कई तरह की कठोर शर्तें जुड़ी हुई हैं। लिहाजा यह मामूली अवमूल्यन उस दिशा में भी एक कदम हो सकता है। सच्चाई चाहे जो हो, पर इससे भारत को तो नुकसान ही होने वाला है। निर्यात पर असर पड़ने के अलावा रुपया भी कमजोर हुआ है। फिलहाल रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से अपने यहां स्थिति थोड़ी नियंत्रित है, पर यह कौन कह सकता है कि चीन का यह कदम दुनिया को सचमुच करेंसी वार की तरफ न धकेल दे?

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed