फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   RBI cuts growth forecast

सक्रिय होने का समय

Tue, 30 Jul 2013 08:07 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 30 Jul 2013 08:07 PM IST
विज्ञापन
RBI cuts growth forecast

मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा में रिजर्व बैंक ने इंतजार करने की जो नीति अपनाई है, वह चुनौतियों के समय हमारी लचर आर्थिक नीति का ही सुबूत है, जिसका अर्थव्यवस्था को और नुकसान उठाना पड़ सकता है।

विज्ञापन


चूंकि केंद्रीय बैंक की पहली प्राथमिकता रुपया है, और रुपये को मजबूती देने के लिए बाजार से नकदी सोखने के तमाम उपाय वह पहले ही कर चुका है, ऐसे में, उससे और कठोर कदम की अपेक्षा नहीं थी। लेकिन उसने आर्थिक विकास दर के अनुमान को 5.7 प्रतिशत से घटाकर 5.5 फीसदी करके इतना संकेत जरूर दिया है कि परिदृश्य अच्छा नहीं है। अलबत्ता तिमाही समीक्षा के तत्काल बाद रुपये के गिरने से स्पष्ट है कि इसे थामने की रिजर्व बैंक की कोशिशों का अब तक कोई लाभ नहीं हुआ है।
विज्ञापन


ऐसे में रुपये को मजबूत करने की ओर पूरा ध्यान लगाए बगैर केंद्रीय बैंक ब्याज दर घटाने की साहसी पहल भी कर सकता था। पिछले कुछ समय से रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच आर्थिक नीतियों के मामले में मतभेद जिस तरह सामने आए हैं, वे दुर्भाग्यपूर्ण ही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


केंद्रीय बैंक सरकार से चालू खाते का घाटा कम करने की बात कर रहा है, तो वित्त मंत्री सार्वजनिक तौर पर कह रहे हैं कि रिजर्व बैंक को सिर्फ रुपये को मजबूत करने के बारे में ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को गति देने के बारे में भी सोचना चाहिए। तिमाही समीक्षा से एक दिन पहले प्रधानमंत्री उद्योग घरानों से अगले दो महीनों में और सुधारों का वायदा कर चुके हैं। लेकिन माहौल अनुकूल बनाए बगैर घरेलू उद्योग-धंधों में सुधार कैसे होगा, यह सोचने की बात है।


इस मामले में सरकार के अब तक के कदम भी विफल साबित हुए हैं। कई क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा बढ़ाने का भी लाभ नहीं हुआ है, तो ब्याज दर न घटने से निर्यात संभावनाएं भी न के बराबर हैं। ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि वह केवल विदेशी निवेश के भरोसे न रहकर बांड आदि के जरिये तत्काल विदेशी मुद्रा अर्जित करने की कोशिश करे। इससे रुपये को मजबूती मिलेगी, तो उद्योग-धंधे का भी माहौल बनेगा। जिस तरह की चुनौतियां सामने हैं, उसमें रिजर्व बैंक और सरकार, दोनों अगर मिल-जुलकर कदम उठाएं, तभी बात बनेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed