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चुनौती के बीच सुधार की रेल

Tue, 08 Jul 2014 08:18 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Tue, 08 Jul 2014 08:18 PM IST
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Rail of reforms

अपने पहले ही रेल बजट में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर ध्यान देने, डायमंड चतुर्भुज रेल परियोजना शुरू करने, ऑनलाइन टिकटों का दायरा बढ़ाने और रेलगाड़ी तथा स्टेशनों पर साफ-सफाई, सुरक्षा से लेकर भोजन-पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता बेहतर करने की घोषणा कर रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने जताया है कि एनडीए सरकार रेलवे में आमूलचूल बदलाव की इच्छुक है।

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ऐसे अवसर पर नई रेलगाड़ियों की झड़ी लगा देने के बजाय अपेक्षाकृत कम नई ट्रेनें चलाने और एक्सप्रेस ट्रेनों के गैरजरूरी ठहराव खत्म करने की प्रतिबद्धता बताती है कि सरकार विकास को तरजीह देना चाहेगी। बजट में रेलवे यूनिवर्सिटी खोलने और स्टेशनों को सौर उर्जा से जगमगाने जैसी नवोन्मेषी योजनाएं हैं, तो पूर्वोत्तर से जम्मू-कश्मीर तक रेल पटरियों का जाल बिछाने की संकल्पना भी।
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अलबत्ता रेलवे की खराब सेहत को देखते हुए ज्यादातर घोषणाएं उत्साहित नहीं करतीं। ट्रेनों के परिचालन में प्रति एक रुपया पर महज छह पैसा बचता है और माल भाड़े की तुलना में यात्री किराया बहुत कम है। इसके बावजूद बजट में न संसाधन जुटाने की कोई नई पहल है, न माल ढुलाई को महत्व देने की प्रतिबद्धता।
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रेल मंत्री ने सीधे विदेशी निवेश की बात कही है, पर घाटे की रेल में कौन विदेशी कंपनी पूंजी लगाना चाहेगी? बजट में पुरानी परियोजनाओं का जिक्र तो नहीं ही है, नई रेललाइन शुरू करने की कोई घोषणा भी नहीं है। इसी तरह रेलवे का नेटवर्क सुधारे बिना बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा जिस अंदाज में की जा रही है, वह अव्यावहारिक ज्यादा लगती है।

रेल में सफर करने की इच्छा रखने वाला एक आम भारतीय इतना भर चाहता है कि उसे आसानी से टिकट उपलब्ध हो, सफर के दौरान भोजन और पानी की उपलब्धता रहे, ट्रेन समय पर चले और उसकी यात्रा सुरक्षित हो। पर इस रेल बजट में आम आदमी की चिंता कम दिखती है। ट्रेन में सुरक्षा बढ़ाने और महिला सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी रहने की घोषणा तो स्वागतयोग्य है,पर रेल यात्रा को दुर्घटना मुक्त करने के उपाय बहुत स्पष्ट नहीं हैं।


यह तब है, जब रेल किराया पहले ही बढ़ाया जा चुका है, और अब ईंधन के साथ किराया बढ़ाने का प्रावधान कर रेल सफर को और महंगा करने की पूरी तैयारी है। यही वजह यह है कि प्रधानमंत्री द्वारा समग्र और भविष्योन्मुखी बताए जाने के बावजूद रेल बजट न आम आदमी को पसंद आया है, न बाजार को।    

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