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झारखंड में रघुवर दास

Sat, 27 Dec 2014 02:29 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 27 Dec 2014 02:29 AM IST
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Raghuvar das as Jharkhand chief minister

झारखंड में एक गैर आदिवासी रघुवर दास को नए मुख्यमंत्री के तौर पर चुनकर भाजपा ने फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह पिटी-पिटाई लीक पर चलने में नहीं, बल्कि लीक तोड़ने में विश्वास करती है। इससे पहले हरियाणा में एक गैरजाट को मुख्यमंत्री बनाकर वह इसी सोच का परिचय दे चुकी है। झारखंड में हालांकि अर्जुन मुंडा की हार के बाद भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के लिए बहुत विकल्प भी नहीं था।

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जमशेदपुर, पूर्व के कद्दावर विधायक रघुवर दास विधायी कार्यों के मामलों में अनुभवी हैं, और राज्य के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन जो सबसे बड़ी चीज उनके पक्ष में जाती है, वह है, अमित शाह से उनकी नजदीकी। शाह के कमान संभालने पर वह उपाध्यक्ष बने, और अब मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। भाजपा हालांकि राज्य में अपने बूते बहुमत नहीं ला पाई है और सरकार चलाने के लिए वह आजसू के समर्थन पर निर्भर करेगी, इसके बावजूद रघुवर दास झारखंड के कदाचित पहले मुख्यमंत्री होंगे, जिनके सामने न अस्थिरता की वैसी चुनौती होगी, न भितरघात की उतनी आशंका।
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लेकिन मुख्यमंत्री पद उनके लिए फूलों की सेज नहीं होने जा रहा, तो सिर्फ गैरआदिवासी होने के कारण नहीं, बल्कि सबसे ज्यादा इसलिए कि केंद्र में अपनी ही पार्टी की बहुमत सरकार होने के कारण अपनी विफलता के लिए वह किसी और को दोष नहीं दे पाएंगे। झारखंड उन राज्यों में से है, जहां शिक्षा, रोजगार, सिंचाई, महिला कल्याण, आदिवासियों की बेहतरी और नक्सल-उन्मूलन जैसे कई मुद्दों पर बुनियादी काम अभी शुरू होना है। करीब डेढ़ दशक में नौ मुख्यमंत्री और तीन बार राष्ट्रपति शासन देख चुका यह राज्य भ्रष्टाचार से आजिज आ चुका है और नई शुरुआत का आकांक्षी है। इसीलिए उसने राजनीति के पुराने दिग्गजों में से ज्यादातर को हराकर भाजपा को एक अवसर प्रदान किया है।
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इस लिहाज से देखें, तो झारखंड के नए मुख्यमंत्री के सामने भ्रष्टाचारविहीन विकास की बड़ी चुनौती तो होगी ही, आदिवासियों और पिछड़े लोगों को विकास की मुख्यधारा में लाने का काम भी उन्हें करना होगा।

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