गरीबों का मजाक

टीम डिजिटल/ अमरउजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 03 Feb 2014 01:56 PM IST
'विकास पुरुष' नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार ने गरीबी की नई परिभाषा दी। गुजरात सरकार के अनुसार गांव में रहने वाला व्यक्ति 11 रुपए और शहर का व्यक्ति 17 रुपए रोज कमाता है तो वह गरीब नहीं है। गरीबी के आंकड़े पर केंद्र को घेरने वाले नरेंद्र मोदी ने क्या ये पैमाना तय कर गरीबों का मजाक उड़ाया है। गौरतलब है ‌कि 2011 में योजना आयोग के उपाध्याक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा ‌था कि 32 रुपए कमाने वाला शहरी और 26 रुपए कमाने वाला ग्रामीण गरीब नहीं है। एकतरफ नरेंद्र मोदी अपनी चाय बेचने वाले की छवि को हरसंभव भुनाने की कोशिश करते हैं तो दूसरी तरफ गरीबी के ऐसे मापदंड तय कर गरीबों के जख्मों पर नमक छिड़कने का भी काम करते हैं।

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