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निशाने पर पंजाब
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 27 Jul 2015 08:45 PM IST
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आतंकवाद का लंबा दौर देख चुके पंजाब में अरसे बाद हुए आतंकी हमले को अंजाम देने वाले सारे आतंकियों को ढेर कर दिया गया, पर करीब बारह घंटे चले ऑपरेशन से साफ है कि आतंकी बड़ा नुकसान करने के इरादे से आए थे। आखिर इस हमले में पंजाब पुलिस के एक पुलिस अधीक्षक बलजीत सिंह सहित कुछ जवान शहीद हो ही गए। वास्तव में इस हमले ने 26/11 की याद ताजा कर दी, जब पाकिस्तान से आए आतंकियों ने मुंबई में एक साथ कई जगह हमले कर दर्जनों लोगों को निशाना बनाया था।
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मारे गए आतंकियों के तौर-तरीकों और उनके पास से मिले हथियारों से संकेत मिले हैं कि गुरदासपुर जिले में पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 15 किलोमीटर दूर दीनानगर शहर में हुए इस हमले के तार भी सीमा पार से जुड़े हुए हैं। मुश्किल से तीन-चार की संख्या में आए आतंकियों ने पहले तो एक बस को निशाना बनाने की कोशिश की, उसके बाद कुछ नागरिकों को भी उन्होंने निशाना बनाया और अंत में पुलिस थाने पर हमला कर दिया। इससे यह भी पता चलता है कि हमारा खुफिया तंत्र कहीं न कहीं नाकाम साबित हुआ है।
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दूसरी ओर पंजाब पुलिस के विशेष दस्ते (स्वैट) के जांबाज जवानों ने आतंकियों का जिस तरह से डटकर मुकाबला किया, उसकी तारीफ की जानी चाहिए। मगर असली सवाल यह है कि आखिर पंजाब के इस सीमावर्ती जिले में इस हमले के पीछे कौन-सा संगठन है और उसका मकसद क्या है? हमले के समय और प्रकृति को देखें, तो तीन वजहें दिखती हैं, पहला यह कि जम्मू-कश्मीर से सटे इस क्षेत्र में इस हमले को अमरनाथ यात्रा को बाधित करने के इरादे से अंजाम दिया गया हो, दूसरा, इसके पीछे फिर से खालिस्तानी चरमपंथ को जिंदा करने की कोशिश हो और तीसरा भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की कोशिश को तोड़ने के लिए यह हमला किया गया हो; मगर इन तीनों ही स्थितियों में शक की सूई पाकिस्तान की ओर ही जाती है।
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जाहिर है, संसद में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बयान से पूरी स्थिति स्पष्ट होगी, जिन्होंने हमले का करारा जवाब देने की बात की है; मगर इसके साथ यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि पंजाब में खालिस्तानी चरमपंथी भावनाओं को दोबारा कोई हवा न दे।