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तंत्र में जन का हस्तक्षेप

Fri, 25 Jan 2013 09:33 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 25 Jan 2013 09:33 PM IST
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public intervention in system

चौसठवें गणतंत्र दिवस से ठीक पहले मुंबई के आतंकी हमले के षड्यंत्रकारी डेविड हेडली को अमेरिका में सुनाई गई 35 बरस जेल की सजा की खबर से अपने देश के लोगों को भी राहत महसूस हुई होगी। मगर अमेरिकी अदालत ने हेडली और उसके साथी तहव्वुर हुसैन राणा के मामले में भारत के पक्ष को जिस तरह नजरंदाज किया, उससे अमेरिका का दोहरापन उजागर हुआ है।

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इससे साफ है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत को न केवल अपना आंतरिक तंत्र मजबूत करना होगा, बल्कि उसे कूटनीतिक मोर्चे पर भी अधिक सजगता दिखानी होगी। वास्तव में अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा ही किसी भी गणतंत्र की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। और जब हम सुरक्षा की बात करते हैं, तो इसमें सम्मानजनक तरीके से जीने का अधिकार और लैंगिक समानता जैसे मुद्दे स्वतः ही जुड़ जाते हैं।
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हम यह गणतंत्र दिवस 16 दिसंबर को एक अत्यंत प्रतिभाशाली युवती के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की बर्बर घटना के बाद मना रहे हैं, जिसने हमारी सामूहिक चेतना को झकझोर कर रख दिया। यह हमारे तंत्र की खामियां हैं, जिसकी वजह से आम लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ा और जिसकी परिणति जस्टिस जे एस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट के रूप में सामने आई है। यह तंत्र में आम आदमी के हस्तक्षेप का नतीजा है।
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सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ, तो इसका सीधा जवाब है कि हमारा तंत्र छह दशकों बाद भी जवाबदेह नहीं बन पाया है। इसकी खामियां राजनीतिक वर्ग में देखी जा सकती हैं, जिसके प्रति लोगों का भरोसा लगातार गिरता जा रहा है। इसीलिए कभी पंचवर्षीय योजना को मंजूरी देने के लिए हुई राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक राजनीतिक वर्चस्व दिखाने का मंच बन जाती है, तो कभी न्यायपालिका को नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप करना पड़ता है।

यह विडंबना है कि हम आज तक गरीबी हटाना तो दूर, गरीबी रेखा की कोई मानक परिभाषा तक तय नहीं कर पाए हैं। बेशक यह समय विसंगतियों और खामियों को गिनाने का नहीं है, मगर ऐसा करते हुए हम तस्वीर बदलने का संकल्प ले सकते हैं।


इसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड की राजधानी के बलात्कार की घटना पर की गई यह टिप्पणी मददगार हो सकती है, कोई भी नीति नियंता इस तथ्य की ओर ध्यान नहीं देता कि आय के और अधिक समान वितरण से हम महिलाओं की कहीं अधिक मदद कर सकते हैं।

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