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दबाव पाकिस्तान पर

Fri, 10 Jul 2015 08:37 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Jul 2015 08:37 PM IST
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Pressure on pakistan

एक साल से भी अधिक समय बाद नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच रूस के उफा में हुई मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी, इसका पता दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा लिए गए कुछ साझा फैसलों से तो चलता ही है, अगले साल सार्क बैठक में पाकिस्तान जाने के हमारे प्रधानमंत्री के निर्णय से भी यह जाहिर है।

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पाकिस्तान के साथ जिस सौहार्दपूर्ण संबंधों की उम्मीद में नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज शरीफ को बुलाया था, बेशक वह पूरी नहीं हुई है। मुंबई हमले के दोषियों को सजा देना तो दूर की बात, अभियोजन की नाकामी से मुंबई हमले का मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी जेल से छूट गया है। सीमा पर पाक सैनिक संघर्षविराम का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं, और पिछले दिनों पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने टिप्पणी की कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प खुला हुआ है। इस पृष्ठभूमि में हुई मुलाकात को अपने यहां यदि बहुत गर्मजोशी से नहीं लिया गया, तो इसे समझा जा सकता है।
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पर शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ चीन और पाकिस्तान, दोनों को सख्त संदेश दिया है। लखवी के मामले में चीन के रुख पर मोदी ने शी जिनपिंग से जहां अपनी नाराजगी जताई, वहीं नवाज शरीफ के साथ बातचीत में आतंकवाद पर अंकुश लगाने के प्रति जैसी सहमति बनी है, वह भारत के सख्त रुख के बगैर संभव नहीं थी। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर बातचीत होनी है, इसके अलावा धार्मिक पर्यटन को बढ़ाना देने, जेलों में कैद मछुआरों को छोड़ने और दोतरफा व्यापार को गति देने की दिशा में भी कदम उठाए जाने पर सहमति बनी है।
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हालांकि मुंबई हमले के मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने और आतंकवादियों के वॉयस सैंपल साझा करने पर नवाज शरीफ की सहमति चौंकाने वाली है। जिस पाकिस्तान ने अब तक इस मुद्दे पर थोड़ा भी सहयोग नहीं किया, वह क्या वाकई इस मसले पर सहयोग करेगा या फिर एक बार वह हमारी आंखों में धूल झोंक रहा है! उसकी मंशा चाहे जो भी हो, यह साफ है कि आतंकवाद को निर्मूल करने की दिशा में आगे बढ़कर ही वह भारत के साथ बेहतर रिश्ता बनाने की उम्मीद कर सकता है।

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