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केजरीवाल की राजनीति
नई दिल्ली
Updated Wed, 09 Apr 2014 07:17 PM IST
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राजनीति में आम धारणाएं क्या मायने रखती हैं, वह आज आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से बेहतर भला कौन समझ सकता है! उन्हें थप्पड़ जड़ने वाले ऑटो ड्राइवर ने, जिसे उन्होंने अब माफ कर दिया है, उन पर अपने वायदे पूरे नहीं करने के आरोप लगाए हैं। हालांकि राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है कि लोगों से किए गए सारे वायदे पूरे कर लिए जाएं।
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आखिर इस देश में ऐसी कितनी पार्टियां या सरकारें हैं, जिन्होंने जनता से किए सारे वायदे समयबद्ध तरीके से पूरे कर दिखाए! असल में इस देश में राजनीतिक रूप से एक बड़ा तबका शुरू से हाशिये पर रहा है, यह वही वर्ग है, जिसे राहुल गांधी गरीबी की रेखा से नीचे उठाकर मध्यवर्ग में लाना चाहते हैं और जिसे नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा नव मध्यवर्ग के रूप में देख रही है।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को जो विजय मिली थी, उसमें इस तबके की भी बड़ी भूमिका थी। केजरीवाल ने जिस व्यवस्था को बदलने का वायदा किया था, उससे सबसे अधिक त्रस्त यही वर्ग रहा है। इसलिए दिल्ली में जब उन्होंने बिजली बिल आधा करने से लेकर मुफ्त में पानी देने के वायदे किए, तो लोगों का उन पर भरोसा जमा।
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यही वर्ग रोजमर्रा के भ्रष्टाचार से भी त्रस्त रहा है। मगर सिर्फ 49 दिनों में दिल्ली की सरकार से हटने के बाद केजरीवाल पर रणछोड़ होने के जो दाग लगे हैं, वह छूटे नहीं छूट रहे हैं! उन्हें इस पर क्यों विचार नहीं करना चाहिए कि आखिर जिन लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ उठाया था, वे अचानक उनके खिलाफ क्यों होते जा रहे हैं?
उनके राजनीतिक तौर-तरीकों से असहमति जताई जा सकती है, लेकिन जिस तरह से उन पर हमले किए जा रहे हैं, उन्हें किसी भी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता। इससे फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें मुक्का मारने वाले या थप्पड़ जड़ने वाले आप के ही पूर्व कार्यकर्ता थे, सवाल उनकी सुरक्षा का है।
आखिर उन पर दिल्ली से बाहर भी हमले किए गए हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि वह एक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने देश में लालबत्ती संस्कृति और सुरक्षा घेरे में रहने की राजनीति को तोड़ने की पहल की है। और फिर बात सिर्फ केजरीवाल की नहीं है, किसी भी नेता या राजनीतिक कार्यकर्ता पर एक लोकतंत्र में ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।