विज्ञापन

विकास की बैठक में राजनीति

Vikrant Chaturvedi Updated Fri, 28 Dec 2012 12:35 AM IST
politics in development meeting
विज्ञापन
ख़बर सुनें
राष्ट्रीय विकास परिषद की सालाना बैठकें अब आपसी तालमेल के बजाय घनघोर असहमति के लिए ही ज्यादा जानी जाती हैं। जिस परिषद को केंद्र और राज्यों के बीच सर्वोच्च नीति निर्धारक मंच माना जाता है, उसकी बैठकों में मुख्यमंत्रियों का सोते पाया जाना या उनका गुस्से से उठकर चले जाना भी अब शायद ही किसी को चौंकाता हो। यह सच है कि राजनीतिक और आर्थिक लाचारी का परिचय देती केंद्र सरकार संघीय ढांचे का पालन करने में भी उत्तरोतर विफल साबित हुई है।
विज्ञापन
सवाल उठता है कि भेदभाव का आरोप हमेशा विपक्षी राज्य सरकारें ही क्यों लगाती हैं। राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठकों में राज्य सरकारों द्वारा असंतोष व्यक्त करने का मौका आना ही क्यों चाहिए? केंद्र सरकार की ओर से समय रहते ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती, जिससे कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसर व्यर्थ के विवाद में न बदलें? पर विरोधी मुख्यमंत्रियों के रवैये की भी बहुत सराहना नहीं की जा सकती।

ममता बनर्जी ने इस बार की बैठक में शिरकत नहीं की, क्योंकि पश्चिम बंगाल को वित्तीय मदद देने की उनकी मांग को केंद्र ने अनसुनी कर दी है। पर यही ममता पिछली बार की बैठक में थीं, जबकि तब से अब तक केंद्र के रवैये में बदलाव नहीं आया है। जयललिता बैठक से इसलिए बाहर निकल आईं, क्योंकि वक्ताओं के लिए आवंटित दस मिनट का समय उन्हें अपमानजनक लगा! एक दिन की बैठक में प्रधानमंत्री, राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग पैंतीस प्रतिनिधियों, योजना आयोग के उपाध्यक्ष तथा वित्त और कृषि मंत्रियों को अपनी बात रखने का अवसर देने के लिए इससे अधिक वक्त क्या वाकई दिया जा सकता है!

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी ने अपने राज्यों में विकास की अमिट इबारत लिखी है। एक राज्य सामाजिक मोर्चे पर पिछड़ा होने के बावजूद विकास की शानदार कहानी कह रहा है, तो दूसरा बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकल आया है। इसके बावजूद एक मुख्यमंत्री अपने राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग कर रहा है, तो दूसरा वैश्विक मंदी की सच्चाई नकारकर गुजरात मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के तर्क गढ़ रहा है। ऐसे में 12वीं पंचवर्षीय योजना को अंतिम रूप देने का लक्ष्य कहीं पीछे छूट गया लगता है।   

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

City and States Archives

घबराएं नहीं, पुलिस को बताएं, जेल में होंगे अपराधी

अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत स्कूली बच्चों के मन से पुलिस का डर निकालने और उन्हें उनके अधिकारों व पुलिस कार्यप्रणाली की जानकारी दी।

21 नवंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

शाहरुख खान के बेटे अबराम को मीडिया पर आया गुस्सा, देखिए चिल्लाकर क्या बोले

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान के बेटे अबराम बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर स्टार किड्स में से एक है। इन दिनों अबराम का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें दिख रहा है कि वो फोटोग्राफर्स से तंग आकर उन पर चिल्ला पड़ते हैं।

21 नवंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree