फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Other Archives ›   Plight of Tamil fishermen

तमिल मछुआरों का दर्द

Thu, 30 Oct 2014 08:40 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Thu, 30 Oct 2014 08:40 PM IST
विज्ञापन
Plight of Tamil fishermen

श्रीलंका की एक अदालत ने चार वर्ष पूर्व गिरफ्तार किए गए पांच तमिल मछुआरों को कथित तौर पर मादक पदार्थ रखने का दोषी पाकर मृत्युदंड की सजा सुनाई है, जिससे पता चलता है कि तमिल मछुआरों का मामला कितना जटिल हो गया है।

विज्ञापन


भारत सरकार ने ऊपरी अदालत में इस फैसले को चुनौती देने का आश्वासन दिया है, लेकिन इस मामले ने भारत और श्रीलंका के बीच स्थित अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा और मछुआरों से जुड़ी पुरानी समस्या की ओर ध्यान खींचा है। श्रीलंका के तमिलों के उत्पीड़न के साथ ही उसके नौसैनिकों द्वारा तमिल मछुआरों को गिरफ्तार करने और उनकी नौकाएं जब्त करने की वजह से दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार तनाव हो चुका है।
विज्ञापन


इसके अलावा केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच भी टकराव की यह एक बड़ी वजह रहा है। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता सिर्फ इसलिए शामिल नहीं हुई थीं, क्योंकि उसमें श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे भी शामिल थे और उसी दौरान श्रीलंका की नौसेना ने कुछ तमिल मछुआरों को गिरफ्तार किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि राजपक्षे ने सौजन्यता दिखाते हुए कुछ तमिल मछुआरों की रिहाई के आदेश दिए थे, मगर उनमें मादक पदार्थों की कथित तस्करी के आरोप में पकड़े गए मछुआरे शामिल नहीं थे। हालांकि यह भी सच है कि भारतीय सीमा में घुस आए श्रीलंका के मछुआरों को गिरफ्तार करने से भारतीय जवान भी गुरेज नहीं करते।

2011 के बाद से श्रीलंका ने जहां 600 से अधिक भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया वहीं, भारत ने श्रीलंका के 450 मछुआरों को। मछुआरों की यह समस्या भारत और पाकिस्तान की सीमा खासतौर से गुजरात में भी देखी जा सकती है, जहां अक्सर दोनों देशों के मछुआरे एक दूसरे की सीमा में घुस आते हैं।

लेकिन तमिलनाडु का मामला इससे अलग है, जिसे दोनों देशों के बीच 1974 में हुए समझौते के बरक्स देखने की जरूरत है। उस समय भारत ने एक निर्जन द्वीप कच्चाथिवू पर श्रीलंका का स्वामित्व स्वीकार कर लिया था और दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा को मान्यता दी थी।


लेकिन तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह समझौता ही गलत था, क्योंकि इस द्वीप पर ऐतिहासिक और कानूनी रूप से भारत का दावा बनता है। जाहिर है, मामला सौजन्यतावश होने वाली मछुआरों की अदला-बदली से आगे निकल गया है, जिसे स्थायी तौर पर सुलझाने की पहल होनी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed